Competitive Exam Paper Leak Racket: जहां एक ओर छात्र अपने सपनों को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, लाखों रुपये खर्च कर कोचिंग लेते हैं और सालों तक कठिन तैयारी में जुटे रहते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग शॉर्टकट के नाम पर इस मेहनत की कीमत को मिट्टी में मिला देते हैं। प्रतियोगी परीक्षाएं, जो योग्यता और ईमानदारी की कसौटी मानी जाती हैं, अब ऐसे गिरोहों के निशाने पर हैं जो पैसों के दम पर नकल का खेल खेलते हैं। इसी कड़ी में द्वारका जिला पुलिस ने एक बड़े संगठित नकल रैकेट का पर्दाफाश करते हुए छह आईआईटीयन समेत 32 स्टूडेंड को पकड़ा है। यह गिरोह हाईटेक तकनीक का इस्तेमाल कर ऑनलाइन एंट्रेंस एग्जाम में धांधली करता था। दरअसल मुंबई के एक नामी मैनेजमेंट संस्थान में एडमिशन के लिए 7 अप्रैल को जयपुर, राजस्थान की एक कंप्यूटर लैब में ऑनलाइन परीक्षा आयोजित हो रही थी।
“हैप्पी होम्स” नाम की बिल्डिंग में संदिग्ध गतिविधियां
डीसीपी कुशल पाल सिंह ने बताया कि सेक्टर-23 द्वारका स्थित “हैप्पी होम्स” नाम की बिल्डिंग में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी। इस पर कार्रवाई करते हुए हेड कांस्टेबल शेर सिंह और विक्की की टीम ने मौके पर छापा मारा, जहां कई युवक लैपटॉप और कंप्यूटर के साथ मौजूद मिले। पूछताछ में पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि इस गिरोह का मास्टरमाइंड हर्षवर्धन (28) है, जो बिहार का रहने वाला है। वह अपने साथियों के साथ मिलकर विभिन्न एंट्रेंस एग्जाम के लिए कैंडिडेट्स अरेंज करता था। परीक्षा से करीब एक सप्ताह पहले किराए की बिल्डिंग में सेटअप तैयार किया जाता था और वहीं से पूरा ऑपरेशन चलाया जाता था।
रिमोट एक्सेस से होता था पूरा खेल
आरोपी एनीडेस्क जैसे रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर के जरिए एग्जाम सेंटर के कंप्यूटर सिस्टम को एक्सेस करते थे। असली कैंडिडेट सिर्फ लॉगइन करता था, जबकि दूसरे स्थान पर बैठे “पेपर सॉल्वर” सवाल हल करते थे। गिरोह से जुड़े सॉल्वर कॉलेज छात्रों को बायजू और डाउटनट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए जोड़ा जाता था। उन्हें हर एक सवाल हल करने के बदले 500 से 1000 रुपये तक दिए जाते थे। मौके पर पकड़े गए 32 युवक इसी तरह के लालच में वहां बुलाए गए थे।
प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्र शामिल
गिरफ्तार आरोपियों में आईआईटी रुड़की, आईआईटी दिल्ली, डीटीयू और दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के छात्र शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क देशभर में फैला हो सकता है और इससे जुड़े और भी लोग सामने आ सकते हैं। पुलिस मामला दर्ज कर आगे की जांच पड़ताल कर रही है। फिलहाल पूरे रैकेट के नेटवर्क, फंडिंग और अन्य लिंक की जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के हाईटेक नकल गिरोह न केवल परीक्षा प्रणाली को कमजोर कर रहे हैं, बल्कि मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ भी गंभीर खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।






















