देश की राजधानी दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता खराब होने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने बुधवार, 21 अक्टूबर से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) के पहले चरण को लागू कर दिया है। सीएक्यूएम ने यह फैसला हवा की गुणवत्ता की समीक्षा और मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए लिया है। आयोग के अनुसार, 20 अक्टूबर को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 179 था, जो मध्यम श्रेणी में आता है। वहीं, 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे यह बढ़कर 244 हो गया, जो खराब श्रेणी में आता है । दरअसल आधिकारिक सूचना के मुताबिक, आने वाले दिनों में भी दिल्ली की हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में रहने की आशंका है। इसी को देखते हुए जीआरएपी के पहले चरण को लागू किया गया है।
आखिर क्या है GRAP..?
GRAP आपातकालीन उपायों का एक समहू है जो दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) लागू किया जाता है। इसके तहत प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर चार चरणों में अलग-अलग पाबंदियां और उनके उपाय लागू किये जाते हैं। GRAP-1 को वायु गुणवत्ता ‘खराब’ होने पर लागू किया जाता है।
दरअसल बीते दिसंबर 2016 में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 12 जनवरी, 2017 को श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (जीआरएपी) अधिसूचित की और इसके कार्यान्वयन का दायित्व पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण (ईपीसीए) को सौंपा था । इस योजना में दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के विभिन्न स्तरों से निपटने के लिए श्रेणीबद्ध उपाय निर्धारित किए गए।
क्या होंगी दिल्ली-NCR में GRAP-1 की गाइडलाइन: कब से लागू और क्या हैं नियम?
जानकारी के अनुसार प्रदूषण बढ़ने पर CAQM ने 21 अक्टूबर 2026 से पहला चरण लागू किया है,जो की AQI 201 से 300 के बीच होने पर लागू होते हैं ये उपाय।
साथ ही इसके कुछ नियम भी सरकार के द्वारा लागू किये गए हैं। जिनमे होटल और रेस्तरां मे तंदूर मे कोयला और लकड़ी जलेने पर रोक लगाई गई है, खुले मे कचरा जलाने पर रोक लगाई है,निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर रोक लगी है,वहाँ के पीयूसी ,डीजल जनरेटर,यातायात प्रबंधन शामिल है।
GRAP-1 की प्रमुख गाइडलाइन विस्तार में
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निर्माण कार्य: निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के लिए पानी का छिड़काव, निर्माण सामग्री को ढकना और एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल करना।
*वाहनों पर निगरानी: प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) की जांच और धुआं छोड़ने वाले वाहनों पर कार्रवाई।
*कचरा जलाने पर रोक: खुले में कचरा, पत्तियां और बायोमास जलाने पर सख्ती।
*सड़कों की सफाई: मैकेनिकल स्वीपिंग और पानी का छिड़काव।
*ट्रैफिक प्रबंधन: जाम वाले इलाकों में यातायात सुचारु रखने के लिए अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती।
*डीजल जनरेटर: इनके अनावश्यक इस्तेमाल पर नियंत्रण।
एनसीआर के विद्यालयों पर प्रभाव :क्या स्कूल खुले या बंद?
दरअसल जीआरएपी के पहले चरण के तहत, दिल्ली और एनसीआर के सभी स्कूल पूरी तरह से खुले और कार्यरत रहेंगे। जीआरएपी के आधिकारिक कार्यक्रम में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पहले चरण के अंतर्गत स्कूलों को बंद करने, हाइब्रिड कक्षाओं या शैक्षणिक संस्थानों पर किसी भी प्रकार की पाबंदी अनिवार्य नहीं है।


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