एफबीआई के नाम पर अमेरिकी नागरिकों को डराकर 100 करोड़ की ठगी, पीतमपुरा में पकड़ा गया फर्जी कॉल सेंटर

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Delhi Police Special Cell Action : दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) की टीम ने पीतमपुरा में चल रहे एक अवैध अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। यहां बैठे शातिर ठग अमेरिकी नागरिकों को कॉल कर उन्हें एफबीआईव दूसरी जांच एजेंसियों के फर्जी पत्र भेजकर उन्हें गिरफ्तार करने व कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के नाम पर बुरी तरह डराते। जिसके बाद उनसे मौटी रकम वसूली जाती। यह गिरोह कथित तौर पर इस तरह अमेरिकी नागरिकों से करीब सौ करोड़ की साइबर ठगी कर चुका है। डीसीपी (आईएफएसओ) गौरव त्यागी ने बताया कि एसीपी…

Delhi Police Special Cell Action : दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) की टीम ने पीतमपुरा में चल रहे एक अवैध अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। यहां बैठे शातिर ठग अमेरिकी नागरिकों को कॉल कर उन्हें एफबीआईव दूसरी जांच एजेंसियों के फर्जी पत्र भेजकर उन्हें गिरफ्तार करने व कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के नाम पर बुरी तरह डराते। जिसके बाद उनसे मौटी रकम वसूली जाती। यह गिरोह कथित तौर पर इस तरह अमेरिकी नागरिकों से करीब सौ करोड़ की साइबर ठगी कर चुका है।

डीसीपी (आईएफएसओ) गौरव त्यागी ने बताया कि एसीपी प्रेम चंद्र खंडूरी की देखरेख में इंस्पेक्टर दाता राम की टीम ने पीतमपुरा में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर पर रेड की और दो महिलाओं समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों की पहचान कंवल प्रीत सिंह (43), प्रशांत नंदा (29), अक्षत सिंह (25), चित्रा नरह (27), रोहन जयरथ (31), गौरव सकलानी (24), सचिन घिल्डियाल (26), इरशाद रहमान (22), नवनीत (28), निग्थौजम (25) और फेबो वांगशू (27) के तौर पर की है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी तकनीकी सहायता देने के नाम पर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर करीब 100 करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं। गिरोह पीड़ितों को एफबीआई और अन्य अमेरिकी संघीय एजेंसियों के फर्जी पत्र भेजकर भी डराता था। पुलिस टीम ने मौके करीब 41 लाख रुपये नकद, 29 लैपटॉप, 25 मोबाइल फोन, आठ राउटर और एक कार बरामद की है।

ऐसे डालते थे जाल

पुलिस के मुताबिक आरोपी एफबीआई और अन्य अमेरिकी संघीय एजेंसियों के नाम से फर्जी संदेश और पत्र भेजकर पीड़ितों को कार्रवाई का डर दिखाकर ठगते थे। इसके अलावा आरोपी अमेरिका में बैठे लोगों को तकनीकी सहायता के नाम पर जाल में फंसाते थे। तकनीकी सहायता के लिए एक टोल-फ्री नंबर देकर सीधे पीतमपुरा स्थित कॉल सेंटर से जोड़ दिया जाता।

कॉल सेंटर में बैठे आरोपी पीड़ित के कंप्यूटर में वायरस होने, हैकिंग और उनके बैंक खाते भी खतरे में होने का झांसा देकर डराते हैं। उन्हें एक सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने के लिए राजी किया जाता था। जिसके बाद उन्हें पीड़ित के कंप्यूटर में पहुंच हासिल हो जाती थी। जिसके बाद पीड़ितों को तकनीकी या बैंकिंग समस्या दूर करने के बहाने गिफ्ट कार्ड खरीदने अथवा क्रिप्टोकरेंसी भेजने के लिए उकसाया जाता था।

Sumant Chaudhary