भारत-चीन बॉर्डर पर भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) यूं तो दुश्मन की हर गतिविधि पर बाज की तरह पैनी निगाह रखती है, लेकिन देश की अन्य फोर्स के मुकाबले इनका जज्बा और चुनौतियां कहीं ज्यादा हैं। दरअसल हिमालय की चोटियों पर जहां के जिक्र मात्र से ही आमजन के रोंगटे खड़े हो जाते हैं, वहां आईटीबीपी के हिम वीर जान की परवाह न करते हुए देश की रक्षा में दिन-रात मुस्तैद हैं।
सीमा सुरक्षा के अलावा केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं को यात्रा कराने से लेकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का दायित्व भी निभा रहे हैं। हर मौसम में जिन हिम पर्वतों पर तापमान मानइस में रहता हो, वहां ये वीर दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने का दम भरते हैं।
इसके अलावा सीमा के आसपास रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं तक मुहैया करवाते हैं और उनके लिए ओपीडी भी लगाते हैं। आईटीबीपी को मिली जिम्मेदारी और अनेक अनछुए पहलुओं पर पेश है महानिदेशक एसएस देसवाल से पंजाब केसरी के मेट्रो एडिटर सतेन्द्र त्रिपाठी की खरी-खरी…
भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के इतिहास के बारे में विस्तार से बताएं?
आईटीबीपी का गठन 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद गोरिल्ला रेंज के जवानों से किया गया था, जिससे कि भारत-तिब्बत सीमा पर दुश्मन का हर प्रकार से सामना किया जा सकें। इससे हम अपने देश की सीमा को सुरक्षित रख सकते थे। शुरुआत में 1962-63 में इसकी चार वाहिनियां थीं, लेकिन बाद में जरूरत के साथ बटालियन और जवानों की संख्या बल को बढ़ाया जाने लगा। विशेषकर कारगिल युद्ध के बाद ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक में सभी सुरक्षा बलों को लेकर मंथन हुआ था।
उस समय वन बॉर्डर-वन फोर्स पॉलिसी के तहत भारत-चीन बॉर्डर काकाकोरम से लेकर अरुणाचल प्रदेश के जाचेप ला तक तक आईटीबीपी को जिम्मा सौंप दिया गया था। आज भारत-चीन सीमा की सुरक्षा का पूरा जिम्मा आईटीबीपी के ऊपर है, जिसमें पांच राज्यों की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर हमारी फोर्स तैनात है। इनमें जम्मू-कश्मीर व लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं। इसके साथ-साथ फोर्स वेल ट्रेंड है और पिछले 57 वर्षों में जवानों ने अपनी काबिलियत को साबित भी किया है।
जवानों पर आंतरिक सुरक्षा, वीआईपी सुरक्षा से लेकर लॉ एंड ऑर्डर तक का जिम्मा है। हर प्रकार की ड्यूटी पर आईटीबीपी के जवान तैनात हैं, आज छत्तीसगढ़ में भी हमारे जवान तैनात हैं। नक्सलवाद से निपटने में भी जवान अपनी कुशलता का परिचय दे रहे हैं। आंतरिक सुरक्षा की बात करें तो कश्मीर घाटी में आईटीबीपी के जवान सक्रिय हैं, वहीं काबुल में भारतीय दूतावास में हमारे जवान हैं।
श्रीलंका में भी भारतीय दूतावास की सुरक्षा का जिम्मा पहले आईटीबीपी पर रह चुका है। यूएन मिशन में भी 30 साल से आईटीबीपी की सहभागिता रही है। पहले कोसोवा और अब कांगो में तैनात हैं। चुनाव में देशभर में जवानों को लगाया जाता है। इस मौसम में कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान भी आईटीबीपी के जवानों का पूरा सहयोग बना रहता है।
विषम परिस्थितियों में तैनाती और कठिन प्रशिक्षण के बूते ही जवान बर्फ और पानी में भी तैनात रहते हैं, इसके पीछे क्या प्रेरणा है?
एक अनुभव के साथ भी फोर्स को ताकत मिलती है। आईटीबीपी में दो सबसे मुश्किल टास्क हैं। एक तो बॉर्डर के दूसरी तरफ पड़ोसी देश ताकतवर है। वहां सचेत रहना बेहद जरूरी है, जिसके लिए फोर्स को समय-समय पर अपडेट किया जाता है। इसके अलावा जलवायु भी एक अहम विषय है। दुर्गम क्षेत्रों में बल की अग्रिम चौकियां नौ हजार फुट से 18 हजार 800 फुट तक की ऊंचाई पर हैं।
11 हजार फुट से ऊपर 130 पोस्ट हैं, वहां पर पहले चढ़ाई करना, हथियारों को लादना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। सर्दियों में कई माह तक तापमान माइनस में रहता है। कम ऑक्सीजन, अधिकतम ऊंचाई और चुनौतीपूर्ण मौसम के हालात में दुश्मन पर नजर रखना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में काम करते करते हमारे जवान अनुभवशाली हो जाते हैं। इसीलिए आईटीबीपी के जवानों को हिम वीर कहते हैं।
जिन इलाकों में हमारे जवान हैं, वहां आबादी भी नहीं होती है और सुविधाओं का बेहद अभाव है। ऐसे में ऊंचाई वाले इलाकों से लोग नीचे वाले इलाकों में रुख करते हैं। हमारे डॉक्टर भी नियमित ओपीडी लगाकर लोगों और उनके पशुओं का भी उपचार करते हैं। जलवायु के अनुसार बर्फ पड़ने या दुर्घटना होने पर जवान पूरी मदद करते हैं। हिमालय पर्वत श्रृंखला सबसे ऊंची पर्वतमाला है, यहां पूरी दुनिया से लोग पर्यटन के लिए आते हैं। पैदल, साइकिल और मोटरसाइकिल से लोग राइड करते हैं। मौसम में फंस जाते हैं तो आईटीबीपी ही उन्हें हर संभव सहयोग करती है।
पर्यावरण के लिए क्या करते हैं और स्वच्छता को कैसे बढ़ावा देते हैं?
पर्यावरण के लिए भी आईटीबीपी के जवान कार्य करते हैं क्योंकि उनकी तैनाती प्रकृति की गोद में रहती है। जितने भी हमारे कैंपस हैं, उन्हें साफ किया है। दो साल में स्वच्छता अभियान के दौरान कूड़े को कैंपस में ही डिस्पोज कर दिया जाता है। यह एजेंडा न केवल कैंपस, बल्कि सभी जगह ध्यान में रखा जाता है। सिविक एक्शन प्रोग्राम के तहत जनता को भी जागरूक करते हैं। यात्रियों को भी जागरूक करते हैं।

कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को बताया जाता है कि वे स्वच्छता को बढ़ावा दें। उन्हें कहा जाता है कि वे घर और आसपास के वातावरण को साफ रखें। भविष्य की पीढ़ियों के लिए हम क्या छोड़ जाएंगे तो सबसे आवश्यक है कि उन्हें स्वच्छ वातावरण प्रदान किया जाए। देश के नागरिकों की मानसिकता में जब सफाई बस जाएगी तो हमारा देश निश्चित ही साफ सुथरा बनेगा।
आईटीबीपी ने विदेशियों के शव निकालने में चुनौतीपूर्ण काम किया। इस ऑपरेशन को कैसे अंजाम दिया गया?
देखिए जब अपने देश के नागरिक या विदेशी कोई भी एडवेंचर के लिए आता है तो एक प्रकार का भरोसा उन्हें देना जरूरी है। देश का सिस्टम उन्हें पूरा सहयोग करेगा। ग्लोबल टूरिस्ट के लिए यह भावना होना बहुत जरूरी है। देश के सुंदर हिस्सों को हमारे नागरिकों के अलावा विदेशी भी आकर देखेंगे तो टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। मानवता के आधार पर हमारे प्रशिक्षित जवानों ने, जो कि औली में लगातार ट्रेनिंग लेते हैं।
हम दूसरी फोर्स के जवानों को भी ऑन डिमांड ट्रेनिंग देते हैं। अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का भी आयोजन होता है। माउंट एवरेस्ट पर जाने वाले ट्रेनर पर्वतारोहियों के शवों को लेकर आने का प्रण उन्होंने किया। मौसम अनुकूल न होने के कारण हेलीकॉप्टर से जाना संभव न था। इसके बाद हमारे जवान पैदल ही वहां गए और शवों को लेकर आए। इस पूरे ऑपरेशन में करीब एक महीना लगा था। चार पर्वतारोहियों को तो सुरक्षित निकाला गया और स्वस्थ्य होकर अपने देश चले गए। अन्य आठ के शवों को भी प्रयास कर निकाल लिया गया।

इस ऑपरेशन से अपने देश की काबिलियत का लोहा भी पूरे विदेश में माना गया। हम पूरी क्षमता से परिपूर्ण हैं, इसका संदेश भी विदेशों में गया है। 2010 से अभी तक आईटीबीपी 200 से अधिक रेस्क्यू ऑपरेशन चला चुका है। 2013 में केदारनाथ में आई त्रासदी और 2018 में केरल में आई बाढ़ में बचाव कार्य किया।
आईटीबीपी के जवानों की स्पोर्ट्स में क्या गतिविधियां रहती हैं?
इस साल आईटीबीपी आइस हॉकी का नेशनल चैम्पियन रही है। इसके अलावा कराटे, जूडो में हमारी टीम का ऑल इंडिया पुलिस गेम्स और नेशनल गेम्स में बेहतर प्रदर्शन रहता है। स्पेशल एडवेंचर स्कीम में और आइस हॉकी में हमारी टीम हमेशा चैम्पियन रहती है। हमारे सात पर्वतारोही पद्मश्री प्राप्त हैं, अभी तक हैं। 12 तेनजिंग नोरगेे साहसिक खेल अवार्ड प्राप्त भी हैं और 212 सफल पर्वतारोही रहे हैं। विभिन्न पहाड़ों पर हमारे जवान अपनी गतिविधियां करते रहते हैं।
पर्वतमाला पर हमारे जवान हर प्रकार की ड्यूटी कर सकते हैं। हर पर्वत पर इवेंट किए हैं और पूरी उम्मीद है कि हमारी स्पोर्ट्स टीम अगले एक साल में और बेहतर प्रदर्शन कर ऑल इंडिया पुलिस गेम्स और नेशनल गेम्स में विशेष स्थान प्राप्त करेगी। हमारी कामना है कि अनेक प्रतियोगिताओं में आईटीबीपी के जवान विदेशों में आयोजित प्रतियोगिताओं में नए कीर्तिमान स्थापित करें।
कोई ऐसा किस्सा बताएं जिसमें जनता को बचाया गया हो तो उनका पहला रिएक्शन क्या था?
अमरनाथ यात्रा में ही पत्थर गिरने पर जवानों ने श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। उन्हें चोट भी लग सकती थी और नुकसान पहुंच सकता था। कैलाश मानसरोवर यात्रा में भी ऐसे ही श्रद्धालुओं का पूरा ध्यान रखा जाता है। ऊंचाई पर चढ़ने पर उन्हें मालूम नहीं होता कि स्वास्थ्य को लेकर क्या-क्या दिक्कत आ सकती है। कई बार लोगों की जान तक चली जाती है। हमारे जवान मेडिकल हेल्प देते हैं, जिससे लोगों की जिंदगी बचाई जाती है। जिन लोगों को ऑपरेशन के दौरान बचाया जाता है वे पूरी फोर्स का आभार व्यक्त करते हैं।
आईटीबीपी के जवानों पर बॉर्डर की सुरक्षा के अलावा क्या-क्या जिम्मा रहता है?
सीमा सुरक्षा मुख्य ड्यूटी है और उसके अलावा नक्सलवाद को काबू करना शामिल है। चुनाव में ड्यूटी लगती है, जम्मू-कश्मीर में आंतरिक सुरक्षा, कहीं लॉ एंड ऑर्डर बिगड़ने पर, यूएन मिशन, विदेशों में भारतीय दूतावासों पर सुरक्षा आदि में आईटीबीपी के जवान तैनात होते हैं। हमारे जवान अपनी क्षमतानुसार हर चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं।
आईटीबीपी के जवान धार्मिक यात्रा के दौरान निष्फल सेवाभाव से लोगों की सेवा करते है, कैसे?
इंसान जितनी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में रहता है उसकी क्षमता और मानवीयता उसमें बढ़ती चली जाती है। हमारे जवान दुर्गम क्षेत्रों में तैनात रहकर विषय परिस्थिति का सामना करते हैं और उनमें जनता के प्रति सेवाभाव काफी बढ़ जाता है। मौका मिलने पर वे अपनी जान की परवाह न करते हुए जनता की मदद करते हैं। कैलाश मानसरोवर और अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की देखरेख का जिम्मा आईटीबीपी के जवान बखूबी निभा रहे हैं।
आईटीबीपी को आप किस पायदान पर मानते हैं। भविष्य में इस बल को आप किस दृष्टि से देखते हैं?
हर फोर्स का फ्यूचर तो उसकी ट्रेनिंग और हर प्रकार की ड्यूटी निभाने की कला पर निर्भर करता है। हर समय चुनौती अलग-अलग रूप में होती है। जो भी फोर्स अपडेट रहती है वह हर क्षेत्र में आगे रहती है। हम आईटीबीपी को जरूरत और साधनों के साथ अपडेट करते रहे हैं, जिससे हमारी फोर्स डायनामिक बनी रहे। जिससे कि हर प्रकार की चुनौती को हैंडल कर सके।
आईटीबीपी के महानिदेशक के नाते आप देश के युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे?
देश का युवा आज काफी समझदार है। उनके पास सूचनाओं का स्रोत बहुत अच्छा है। युवाओं को अपनी प्राथमिकता तय करनी है। उन्हें देश को लेकर सकारात्मक सोच रखनी है कि हमारा देश महान है। तकनीक में नए अविष्कार करने हैं। सबसे पहले अपने देश के कानून का पालन करें और उसका सम्मान करें।
देश में कानून की इज्जत करें और उसे लागू करने में शर्म न करें। जहां कानून और पड़ोसी के अधिकारों की इज्जत है या विचारधारा में इंसानियत है। समय की पाबंदी है तो उस देश का युवा हमेशा आगे बढ़ेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि आज की पीढ़ी में बहुत कुछ करने का जज्बा है। वे देश को एक अच्छे मार्ग पर लेकर जाएंगे।


Download Android App
Download iOS App



