लो जी… अब सोशल मीडिया से होने लगी हथियारों की तस्करी!

Summary :

Delhi Police Special Cell News : अब तक सोशल मीडिया का इस्तेमाल दोस्ती, कारोबार या ठगी के लिए होता देखा गया था, लेकिन दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने सोशल मीडिया को अवैध हथियारों की मंडी बना दिया था। फर्जी फेसबुक और इंस्टाग्राम प्रोफाइल, वर्चुअल नंबर और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिए हथियारों के सौदे तय किए जाते थे और फिर मध्य प्रदेश से पिस्टल मंगवाकर दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के अपराधियों तक पहुंचाई जाती थीं।  स्पेशल सेल (ईस्टर्न रेंज) ने इस संगठित नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते…

Delhi Police Special Cell News : अब तक सोशल मीडिया का इस्तेमाल दोस्ती, कारोबार या ठगी के लिए होता देखा गया था, लेकिन दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने सोशल मीडिया को अवैध हथियारों की मंडी बना दिया था। फर्जी फेसबुक और इंस्टाग्राम प्रोफाइल, वर्चुअल नंबर और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिए हथियारों के सौदे तय किए जाते थे और फिर मध्य प्रदेश से पिस्टल मंगवाकर दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के अपराधियों तक पहुंचाई जाती थीं।  स्पेशल सेल (ईस्टर्न रेंज) ने इस संगठित नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए सरगना समेत आठ तस्करों को गिरफ्तार किया है।

बता दें कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरीश चंद्र (24), प्रीतपाल सिंह (24)  शिशपाल सिंह उर्फ यश चौधरी (26) ),  कुलदीप सागर (20) आदेश कुमार (25)  नूर मोहम्मद उर्फ तस्लीम (36)  मोहम्मद शान (19) निवासी अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश) तथा विक्रम सिंह (36)  के रूप में हुई है। इनके कब्जे से 12 सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल, पांच देसी पिस्टल, एक रिवॉल्वर, 10 अतिरिक्त मैगजीन, पांच जिंदा 9 एमएम कारतूस, एक अन्य कारतूस और एक लोहे का हथियार बरामद हुआ है। डीसीपी नारा चैतन्य ने बताया कि एसीपी कैलाश सिंह बिष्ट की निगरानी में इंस्पेक्टर राहुल कुमार, विनीत कुमार तेवतिया और अजीत कुमार की टीम की निगरानी में कई राज्यों में फैले इस नेटवर्क की परतें खोलीं। सबसे पहले 5 जुलाई को मथुरा निवासी हरीश चंद्र को दबोचा गया। उसके पास से आठ अत्याधुनिक पिस्टल और आठ मैगजीन मिलीं।

वहीं, पूछताछ में उसने गिरोह के सरगना शिशपाल सिंह उर्फ यश चौधरी का नाम बताया। इसके बाद पुलिस ने गुरुग्राम से प्रीतपाल सिंह, फरीदाबाद से सरगना शिशपाल, फिर अलीगढ़ और मथुरा में छापेमारी कर कुलदीप सागर, आदेश कुमार, नूर मोहम्मद उर्फ तस्लीम, मोहम्मद शान और विक्रम सिंह को गिरफ्तार कर लिया। सभी की निशानदेही पर लगातार हथियार और कारतूस बरामद होते गए।

तीन साल से चल रहा था हथियार तस्करी का नेटवर्क

जांच में सामने आया कि शिशपाल पिछले तीन साल से हथियार तस्करी का नेटवर्क चला रहा था। वह अपनी असली पहचान छिपाने के लिए फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, एन्क्रिप्टेड चैटिंग ऐप और वर्चुअल मोबाइल नंबर इस्तेमाल करता था। हथियार पहले मध्य प्रदेश और अलीगढ़ से उत्तर प्रदेश लाए जाते, फिर दिल्ली-एनसीआर के सुरक्षित ठिकानों पर छिपाकर अलग-अलग राज्यों के अपराधियों तक पहुंचाए जाते थे।

पुलिस के अनुसार, नूर मोहम्मद पहले से 12 और मोहम्मद शान छह आपराधिक मामलों में शामिल रह चुके हैं, जबकि शिशपाल भी वर्ष 2021 में हथियार तस्करी के मामले में गिरफ्तार हो चुका है। स्पेशल सेल ने इस मामले में आर्म्स एक्ट, भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) और संगठित अपराध सिंडिकेट से जुड़ी धारा 111 के तहत मामला दर्ज किया है। अब पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े फरार तस्करों, सप्लायरों और हथियार खरीदने वाले अपराधियों की तलाश में जुटी है।

Sumant Chaudhary