NDMC News : भ्रष्टाचार का मतलब केवल रिश्वत लेना या पैसे का लेन-देन करना नहीं है। सरकारी अधिकारी या कर्मचारी यदि अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाता, जरूरी काम की अनदेखी करता है या व्यवस्था सुधारने में लापरवाही बरतता है, तो यह भी भ्रष्टाचार का ही एक रूप है। यह बात नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) के अध्यक्ष मनोज कुमार द्विवेदी ने बुधवार को पालिका केंद्र में आयोजित सतर्कता जागरूकता सप्ताह के कार्यक्रम में कही। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि ईमानदारी केवल रिश्वत नहीं लेने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसका असर कामकाज और आम लोगों को मिलने वाली सेवाओं में भी दिखाई देना चाहिए।
एनडीएमसी अध्यक्ष मनोज द्विवेदी ने कहा कि भ्रष्टाचार के दो बड़े रूप हैं। पहला, जब आम नागरिक को अपना जायज काम कराने के लिए परेशान होना पड़ता है। दूसरा, जब कुछ लोग आपसी मिलीभगत से सरकारी व्यवस्था का गलत फायदा उठाते हैं। इन दोनों पर रोक लगाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि एनडीएमसी अपनी सेवाओं को ऑनलाइन और फेसलेस बनाने की दिशा में काम कर रही है, ताकि लोगों को छोटे-छोटे काम के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों के चक्कर न लगाने पड़ें। कार्यक्रम में मुख्य सतर्कता अधिकारी आस्था लक्ष्मी, सचिव राहुल सिंह और वित्तीय सलाहकार राकेश कुमार मौजूद रहे।
एनडीएमसी 26 अक्टूबर से एक नवंबर तक ‘समृद्धि के लिए सत्यनिष्ठा’ विषय पर सतर्कता जागरूकता सप्ताह मना रही है। इस दौरान कर्मचारियों के लिए निबंध, वाद-विवाद और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
रिश्वत और उत्पीड़न की शिकायत के लिए ऐप पर विचार
एनडीएमसी अध्यक्ष ने भ्रष्टाचार की शिकायतों के लिए व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को सुझाव दिया कि शिकायत दर्ज कराने के लिए टेलीफोन नंबर और ईमेल आईडी सार्वजनिक किए जाएं। इसके साथ ही एक विशेष सतर्कता ऐप शुरू करने की संभावना भी तलाशी जाए। इससे नागरिक रिश्वत मांगने, अनावश्यक परेशान करने या काम में जानबूझकर देरी करने जैसे मामलों की शिकायत कर सकेंगे।
टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर
कार्यक्रम के दौरान सरकारी खरीद और ठेकों में गड़बड़ी रोकने के उपायों पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को ई-प्रोक्योरमेंट, निविदा की स्पष्ट शर्तों और सामान्य वित्तीय नियमों का पालन करने के निर्देशों के बारे में जानकारी दी गई। केंद्रीय सतर्कता आयोग की सतर्कता नियमावली, 2026 के तहत शिकायतों की जांच और निस्तारण की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा भ्रष्टाचार की आशंका वाले कार्यों की पहचान कर मानवीय हस्तक्षेप कम करने और तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दिया गया। इससे पहले द्विवेदी ने विभागाध्यक्षों और वरिष्ठ अधिकारियों को सत्यनिष्ठा की शपथ दिलाई।


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