Delhi News : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की नई दिल्ली स्थित मुख्य पीठ ने लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए साधारण मिट्टी निकालने, प्राप्त करने या इस्तेमाल करने के मामले में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफएंडसीसी) के रुख का पालन करने का निर्देश दिया है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि मामले की अगली सुनवाई तक प्रतिवादी मंत्रालय के जवाबी हलफनामे में बताए गए रुख के अनुरूप कार्य करेंगे। यह मामला नोबल एम. पाइकाडा बनाम भारत संघ एवं अन्य से संबंधित है।
इसकी सुनवाई एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने की। आवेदक ने 17 मार्च 2025 को जारी उस अधिसूचना को चुनौती दी है, जिसके माध्यम से पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) अधिसूचना, 2006 के परिशिष्ट-IX की प्रविष्टि संख्या 6 में बदलाव किया गया था। इसके साथ ही अधिसूचना के जरिए जोड़े गए परिशिष्ट-XIV की वैधता को भी चुनौती दी गई है।
मंत्रालय ने बताई व्यवस्था
एमओईएफएंडसीसी ने अपने जवाबी हलफनामे में कहा कि अधिसूचना के तहत लीनियर परियोजनाओं के लिए साधारण मिट्टी निकालने की एक परियोजना-विशिष्ट व्यवस्था बनाई गई है। इसके तहत निर्धारित सीमाओं और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का पालन करना आवश्यक है। मिट्टी की स्वीकार्य मात्रा तय करने और उसकी निगरानी के लिए जिला स्तर पर समिति का प्रावधान भी किया गया है। वहीं, खनन पट्टे से जुड़े मामलों में सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से लागू पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया का पालन करना होगा।
सुनवाई के दौरान आवेदक के वकील ने मंत्रालय के हलफनामे में बताए गए रुख का पालन सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। मंत्रालय के वकील ने इस पर आपत्ति नहीं जताई। इसके बाद पीठ ने प्रतिवादियों को हलफनामे के पैराग्राफ 35 और 37 में दर्ज रुख का पालन करने का निर्देश दिया। मामले में अगली सुनवाई 1 फरवरी 2027 को होगी।


Download Android App
Download iOS App




