Delhi News : सत्य निकेतन में हुए भवन हादसे के बाद दिल्ली सरकार सख्त कदम उठाने जा रही है। अब हर गली-मोहल्ले में पीजी खोलना आसान नहीं होगा। दिल्ली सरकार पीजी को लेकर आगामी एक-दो महीने के अंदर ‘पीजी आवास विनियमन नीति’ लाने जा रही है, जिसके तहत पीजी खोलने से पहले लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। साथ ही पीजी में मनमाना किराया, बिजली बिल सहित बुनियादी सुविधाओं की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। इन्हीं सब मुद्दों को लेकर मंगलवार को शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में एनएसएस स्वयंसेवकों के अलावा पीजी और किराये के मकानों में रहने वाले छात्र शामिल थे। बैठक में छात्रों ने पीजी व्यवस्था से जुड़ी सुरक्षा, किराया, बिजली शुल्क, बुनियादी सुविधाओं और पारदर्शिता की समस्याएं मंत्री के सामने रखीं।
मंत्री आशीष सूद ने छात्रों को आश्वासन दिया कि सरकार अगले एक से दो माह के भीतर पीजी आवास के लिए व्यापक कानून एवं नियमन लेकर आएगी। उन्होंने कहा कि शहरी विकास विभाग पहले से ही पीजी नीति पर काम कर रहा था, लेकिन सत्य निकेतन की घटना ने न्यायमूर्ति गौबा समिति की रिपोर्ट के क्रियान्वयन और नई नीति तैयार करने की प्रक्रिया को और तेज करने की जरूरत पैदा की है।
पीजी संचालकों के लिए अनिवार्य डिजिटल पोर्टल
छात्रों ने मांग की कि ऐसा समर्पित वेब पोर्टल बनाया जाए, जहां पीजी संचालकों को किराया, भोजन, उपलब्ध सुविधाओं और भवन की संरचनात्मक सुरक्षा से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य हो। छात्रों ने मकान मालिकों द्वारा किराया समझौते की शर्तों का पालन नहीं करने और मनमाने बिजली शुल्क वसूलने की शिकायत भी की। इन शिकायतों पर मंत्री ने कहा कि सरकार ऐसे कानूनी प्रावधानों की संभावना तलाश रही है, जिससे निजी पक्षों के बीच होने वाले किराया समझौतों को भी प्रभावी रूप से बाध्यकारी बनाया जा सके। प्रस्तावित ‘पेइंग गेस्ट आवास विनियमन एवं सुरक्षा विधेयक, 2026’ में पीजी संचालन के लिए अनिवार्य लाइसेंस, जोनवार किराया सीमा, संरचनात्मक एवं अग्नि सुरक्षा ऑडिट और केंद्रीय ‘जीओवी पीजी’ पोर्टल जैसी व्यवस्थाएं शामिल करने का प्रस्ताव है।
हॉस्टल क्षमता बढ़ाने और खाली सरकारी भवनों के इस्तेमाल की तैयारी
सरकार विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों को अधिक हॉस्टल बनाने के लिए एफएआर बढ़ाने की अनुमति देने पर विचार कर रही है। साथ ही नरेला सहित खाली पड़ी सरकारी संपत्तियों और अप्रयुक्त भवनों को सुरक्षित छात्रावासों में बदलने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। इन आवासों को छात्रों के लिए सीधी बस सेवा से जोड़ने पर भी विचार किया जा रहा है। मंत्री ने बताया कि निजी क्षेत्र की भागीदारी और केंद्र सरकार की सहायता से छात्र आवास की कमी दूर करने की संभावनाओं पर भी विचार हो रहा है। दक्षिणी परिसर और मुखर्जी नगर सहित प्रमुख छात्र क्षेत्रों में एक सप्ताह के भीतर कड़े संरचनात्मक सुरक्षा ऑडिट कराने तथा हॉस्टल के लिए एफएआर सीमा बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
विपक्ष पर बरसे आशीष सूद
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में आशीष सूद ने सत्य निकेतन हादसे के राजनीतिकरण को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के नेता अफवाहें फैलाकर सनसनी पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि छात्र सुरक्षा, व्यवस्थित सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। सूद ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की संयुक्त अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है। आगे मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल के साथ चर्चा तथा मंत्रिमंडल के विचार-विमर्श के बाद सभी हितधारकों से परामर्श कर नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।


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