Delhi News/ राहुल शर्मा : दिल्ली सरकार में कार्यरत एक्साइज विभाग के इंस्पेक्टर के नाम पर बैंक्वेट हॉल मालिक से रिश्वत की रकम लेने वाला गिरफ्तार प्राइवेट पर्सन विक्रम उर्फ राधे बेशक शिकायत मिलने पर सीबीआई के हाथ अब लगा है, लेकिन उसकी विभाग में पैठ और अधिकारियों के नाम पर रकम वसूलने का धंधा काफी पुराना बताया जा रहा है। इससे पहले वह खुद भी शराब का सप्लायर रह चुका है। सीबीआई उससे बरामद मोबाइल की कॉल और चैट डिटेल्स की जांच के बाद उससे जुड़े अन्य लोगों का पता लगाएगी।
सूत्रों के मुताबिक विक्रम कई वर्षों से एक्साइज विभाग के साथ जुड़ा हुआ है। कई साल पहले दिल्ली पुलिस से प्रतिनियुक्ति पर एक्साइज विभाग में आए एक सहायक पुलिस आयुक्त के समय से इसका काम जमना शुरू हुआ था। उनके कार्यकाल के बाद दिल्ली सरकार के ही एक सहायक आयुक्त आबकारी विभाग के संपर्क में विक्रम आया था। चर्चा है कि इन अधिकारी का गत वर्ष जब तबादला हुआ तो करीब छह माह तक उन्हें एक्साइज विभाग में ही रोक कर रखा गया। आरोप है कि इन अधिकारी के तबादले के बाद भी इन्हीं के नाम पर वसूली का मोटा खेल चलता रहा। मगर जब मार्केट में बात फैली तो विक्रम को डील करने का जिम्मा दिल्ली पुलिस से प्रतिनियुक्ति पर आए सब इंस्पेक्टर पर डाल दिया गया।
एक्साइज विभाग में वसूली के लिए रखे गए प्राइवेट पर्सन का दखल। क्लब और बार में छापेमारी नहीं करने और बाहरी राज्य से लाई गई🍾🍾 ड्रिंक परोसने की छूट के एवज में मांगी जाती थी ₹ 50,000 की मंथली।@LtGovDelhi @CMODelhi @DelhiPolice @PunjabKesariComhttps://t.co/Q2ak7oX519 pic.twitter.com/sDIGTjfiox
— Rahul Sharma 🇮🇳 (@rahuljourno) September 23, 2026
इस तरह विक्रम अब प्रेम के संपर्क में आ गया। एक्साइज विभाग में प्राइवेट पर्सन विक्रम अधिकांश बार-क्लब के संपर्क में बना हुआ था। वेस्ट दिल्ली, साउथ दिल्ली, ईस्ट दिल्ली, रोहिणी और द्वारका में अनेक क्लब-बार में विक्रम का सिक्का जमा हुआ था। विभाग के नाम पर वही क्लब-बार मालिकों से रकम वसूल कर अधिकारियों तक पहुंचाता था। इस फेहरिस्त में वर्तमान और पूर्व के कौन-कौन अधिकारी शामिल हैं, उन सभी के कार्यकाल की भी बारीकी से जांच हो रही है। विक्रम किस अधिकारी के समय से एक्साइज विभाग में घुसपैठ करता आ रहा है, यह सब पता लगाया जा रहा है। उसकी पुलिस में भी अच्छी पकड़ बनी हुई थी।
छापेमारी नहीं करने के नाम पर चलता था वसूली का खेल
दरअसल जिन भी क्लब-बार में शराब परोसी जाती है, वहां पर एक्साइज विभाग की छापेमारी नहीं होने के नाम पर मंथली रकम वसूल की जाती थी। सीबीआई को मिली शिकायत में भी 50 हजार रुपए महीना की रकम की मांग की गई थी। जहां केवल एक दिन के लिए एक्साइज लाइसेंस नाइट पार्टी के लिए जारी किया जाता है, वहां से एक दिन के 25 हजार रुपए तक अवैध रूप से वसूल किए जाते थे। साथ ही दिल्ली में शराब महंगी होने की वजह से पार्टी आयोजनकर्ताओं को हरियाणा ब्रांड शराब पार्टी में इस्तेमाल करने की भी अवैध रूप से छूट दी जाती थी।
वहीं यदि बार या नाइट क्लब में हरियाणा की शराब इस्तेमाल करनी है तो उन्हें ओपनिंग टाइम शुरू होने के बाद सबसे पहले उसी को यूज करने को कहा था जाता था। इस तरह दिल्ली सरकार को चूना लगाकर हरियाणा की शराब भी चोरी-छिपे पार्टियों में उपलब्ध करवाई जाती है। आलम यह था कि एक्साइज विभाग की टीमें छोटे-मोटे शराब तस्करों पर छापेमारी में जुटी रहती थीं और विक्रम सीधे क्लब-बार संचालकों से वसूल की गई रकम एक्साइज विभाग के आला अधिकारियों तक पहुंचा रहा था।
क्या था मामला
सीबीआई को मिली शिकायत के मुताबिक शिकायतकर्ता एक कारोबारी हैं जिनका वेस्ट दिल्ली के कीर्ति नगर में ‘इनवाइटी बैंक्वेट हॉल’ चलता है। आरोप था कि दिल्ली सरकार के एक्साइज विभाग में कार्यरत निरीक्षक प्रेम ने प्राइवेट पर्सन विक्रम उर्फ राधे के माध्यम से उनके बैंक्वेट हॉल में किसी भी राज्य की शराब परोसने की अनुमति देने और वहां पर छापा नहीं मारे जाने के लिए प्रति माह 50 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। शिकायतकर्ता रिश्वत की कोई राशि नहीं देना चाहता था, इसलिए उन्होंने एक्साइज विभाग के इंस्पेक्टर और विक्रम के खिलाफ सीबीआई में शिकायत दी।
जांच में प्रथम दृष्टया पता चला कि विक्रम ने शिकायतकर्ता से कोई छापेमारी नहीं करने की एवज में प्रति माह 50 हजार रुपये का अनुचित लाभ मांगा था। उसके उपरांत विक्रम के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (2018 में संशोधित) की धारा 7 ए के तहत रेगुलर केस दर्ज कर लिया गया और छापेमारी में विक्रम को नकद राशि के साथ गिरफ्तार भी कर लिया गया था। उसके पास से एक से डेढ़ करोड़ रुपए बरामद किए जा चुके हैं। सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा की टीम आगे जांच कर रही है। उसके मोबाइल फोन और चैट की डिटेल्स आने के बाद कई अन्य महत्वपूर्ण नाम सामने आ सकते हैं।


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