यूपीआई शुल्क के खिलाफ सदर बाजार बारी मार्केट ट्रेड्स एसोसिएशन का प्रदर्शन

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Sadar Bazar : यूपीआई लेन-देन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क के विरोध में सदर बाजार बारी मार्केट ट्रेड्स एसोसिएशन के नेतृत्व में व्यापारियों ने प्रदर्शन किया। एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा की अध्यक्षता में हुए प्रदर्शन में व्यापारियों ने सरकार से डिजिटल भुगतान को शुल्क मुक्त रखने और व्यापारियों पर किसी भी तरह का अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डालने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने ‘व्यापारियों पर नया बोझ नहीं सहेंगे’, “यूपीआई हमारा अधिकार, शुल्क लगाना बंद करो” और “डिजिटल भुगतान पर शुल्क बंद करो” जैसे नारे लगाए। प्रदर्शन में व्यापारी नेता दीपक निम्भल, वरिंदर…

Sadar Bazar : यूपीआई लेन-देन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क के विरोध में सदर बाजार बारी मार्केट ट्रेड्स एसोसिएशन के नेतृत्व में व्यापारियों ने प्रदर्शन किया। एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा की अध्यक्षता में हुए प्रदर्शन में व्यापारियों ने सरकार से डिजिटल भुगतान को शुल्क मुक्त रखने और व्यापारियों पर किसी भी तरह का अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डालने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने ‘व्यापारियों पर नया बोझ नहीं सहेंगे’, “यूपीआई हमारा अधिकार, शुल्क लगाना बंद करो” और “डिजिटल भुगतान पर शुल्क बंद करो” जैसे नारे लगाए। प्रदर्शन में व्यापारी नेता दीपक निम्भल, वरिंदर अरोड़ा, जसविंदर सिंह, रजनीश राजेश भयना, जसबीर सिंह सरना, बलविंदर सिंह सरना, राजीव सोहर और तरुण सोनी सहित बड़ी संख्या में व्यापारी मौजूद रहे।

परमजीत सिंह पम्मा ने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के पात्र पर्सन-टू-मर्चेंड (पी2एम) यूपीआई लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेन-देन होगी। उन्होंने कहा कि शुल्क ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाएगा, लेकिन इसका आर्थिक भार अंततः व्यापारी पर ही पड़ेगा।
पम्मा ने कहा कि छोटे और मध्यम व्यापारी पहले ही महंगाई, किराए, कर्मचारियों के वेतन, बिजली-पानी समेत बढ़ते कारोबारी खर्चों से परेशान हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क उनके लिए नई आर्थिक चुनौती पैदा करेगा। उ

न्होंने सरकार से एमडीआर व्यवस्था को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बजाय उस पर शुल्क लगाना व्यापारियों के हित में नहीं है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि व्यापारियों पर प्रस्तावित यूपीआई शुल्क का बोझ वापस नहीं लिया गया तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।

Sumant Chaudhary