विघ्नहर्ता हरेंगे सारे कष्ट! आज विकट संकष्टी पर जरूर से पढ़ें श्री गणेश चालीसा, यहां देखें संपूर्ण लिरिक्स

Summary :

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi: आज विकट संकष्टी चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जा रहा है, जो वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को पड़ता है। यह दिन भगवान गणेश के ‘विकट’ स्वरूप को समर्पित है, जो उनके प्रसिद्ध अष्टविनायक रूपों में से एक माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विकट की आराधना करने से भक्तों को सभी प्रकार के भय, गंभीर रोगों, मानसिक शोक और आकस्मिक दुर्घटनाओं से मुक्ति मिलती है। विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत और नियमपूर्वक पूजन का विशेष महत्व है। श्रद्धालु इस दिन उपवास रखकर गणेश जी की विधि-विधान से अराधना करते हैं और उनके…

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi: आज विकट संकष्टी चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जा रहा है, जो वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को पड़ता है। यह दिन भगवान गणेश के ‘विकट’ स्वरूप को समर्पित है, जो उनके प्रसिद्ध अष्टविनायक रूपों में से एक माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विकट की आराधना करने से भक्तों को सभी प्रकार के भय, गंभीर रोगों, मानसिक शोक और आकस्मिक दुर्घटनाओं से मुक्ति मिलती है।
विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत और नियमपूर्वक पूजन का विशेष महत्व है। श्रद्धालु इस दिन उपवास रखकर गणेश जी की विधि-विधान से अराधना करते हैं और उनके मंगलकारी स्वरूप का ध्यान करते हैं। आध्यात्मिक लाभ और कार्यों की सिद्धि के लिए इस दिन गणेश चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी और शुभ माना गया है। अतः आज के दिन श्रद्धा भाव से पूजन के साथ चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए, ताकि बप्पा की कृपा से जीवन के समस्त विघ्न दूर हो सकें।

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi: गणेश चालीसा लिरिक्स

Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi
Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi (Source: Social Media)

॥ दोहा ॥

जय गणपति सदगुण सदन,कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण,जय जय गिरिजालाल॥

॥ चौपाई ॥

जय जय जय गणपति गणराजू। मंगल भरण करण शुभः काजू॥

जै गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायका बुद्धि विधाता॥

वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना। तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥

राजत मणि मुक्तन उर माला। स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं। मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥

सुन्दर पीताम्बर तन साजित। चरण पादुका मुनि मन राजित॥

धनि शिव सुवन षडानन भ्राता। गौरी लालन विश्व-विख्याता॥

ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे। मुषक वाहन सोहत द्वारे॥

कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी। अति शुची पावन मंगलकारी॥

एक समय गिरिराज कुमारी। पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा। तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा॥

अतिथि जानी के गौरी सुखारी। बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥

अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा। मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥

मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला। बिना गर्भ धारण यहि काला॥

गणनायक गुण ज्ञान निधाना। पूजित प्रथम रूप भगवाना॥

अस कही अन्तर्धान रूप हवै। पालना पर बालक स्वरूप हवै॥

बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना। लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना॥

सकल मगन, सुखमंगल गावहिं। नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं॥

शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं। सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं॥

लखि अति आनन्द मंगल साजा। देखन भी आये शनि राजा॥

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं। बालक, देखन चाहत नाहीं॥

गिरिजा कछु मन भेद बढायो। उत्सव मोर, न शनि तुही भायो॥

कहत लगे शनि, मन सकुचाई। का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई॥

नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ। शनि सों बालक देखन कहयऊ॥

पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा। बालक सिर उड़ि गयो अकाशा॥

गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी। सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी॥

हाहाकार मच्यौ कैलाशा। शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा॥

तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो। काटी चक्र सो गज सिर लाये॥

बालक के धड़ ऊपर धारयो।प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो॥

नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे।प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे॥

बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा। पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥

चले षडानन, भरमि भुलाई। रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई॥

चरण मातु-पितु के धर लीन्हें। तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥

धनि गणेश कही शिव हिये हरषे। नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई। शेष सहसमुख सके न गाई॥

मैं मतिहीन मलीन दुखारी। करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी॥

भजत रामसुन्दर प्रभुदासा। जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा॥

अब प्रभु दया दीना पर कीजै। अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥

॥ दोहा ॥

श्री गणेश यह चालीसा,पाठ करै कर ध्यान।
नित नव मंगल गृह बसै,लहे जगत सन्मान॥
सम्बन्ध अपने सहस्र दश,ऋषि पंचमी दिनेश।
पूरण चालीसा भयो,मंगल मूर्ती गणेश॥

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।