Maa Kushmanda Chalisa Lyrics: आज, 22 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन है, जो देवी दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा की उपासना को समर्पित है। अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना करने वाली मां कुष्मांडा को ‘आदिशक्ति’ और ‘अष्टभुजा देवी’ के रूप में पूजा जाता है। सिंह पर सवार माता के आठों हाथों में अस्त्र-शस्त्र और सिद्धियों की माला सुशोभित है। मान्यता है कि आज के दिन मां की आराधना और चालीसा का पाठ करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि आरोग्य का वरदान भी प्राप्त होता है।
Maa Kushmanda Chalisa Lyrics: माता कुष्मांडा चालीसा

॥दोहा॥
माता कुष्मांडा की जय, करुणा की सागर।
सुख-सम्पत्ति देने वाली, जय माँ, जय अंबर॥
॥चालीसा॥
जयति जयति जगत की माता।
कुष्मांडा देवी सुखदायी भ्राता॥
शुम्भ-निशुम्भ हरणी माता।
भक्तों की विपदा हरणी भ्राता॥
कुश (कुमार) मंद हर्ष से भरी।
चारों ओर कृपा की झरी॥
हंस पर सवार हे माता।
कृपा का अविरल बहाता॥
कुम्भ करों में जल से भरे।
धन-धान्य से भरे सारे घर॥
आभा से दीप्त हे माता।
भक्तों के संकट मिटाता॥
चतुर्थी तिथि शुभ कहलाती।
व्रत रखने से सब सफल होती॥
मंत्र का जप करों हे प्यारे।
जीवन सुखी हो जाए सारे॥
अंत में सुन लो अरज हमारी।
जीवन सवारे भवसागर से॥
जय माता कुष्मांडा भवानी।
कृपा करो हे जगत की रानी॥


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