Papmochani Ekadashi 2026 Vrat Katha in Hindi: पापमोचनी एकादशी की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने यह कथा अर्जुन को सुनाई थी। यह कहानी मेधावी नाम के एक तपस्वी ऋषि की है। बहुत समय पहले, चैत्ररथ नाम का एक बेहद खूबसूरत जंगल था, जहां हमेशा वसंत जैसा माहौल रहता था। उसी जंगल में मेधावी ऋषि भगवान शिव की तपस्या में लीन थे। एक दिन गंधर्व राज चित्ररथ अपनी अप्सराओं के साथ वहां पहुंचे। उनमें से मंजुघोषा नाम की एक बेहद सुंदर अप्सरा ने ऋषि को अपनी सुंदरता और सुरीले संगीत के जाल में फंसाने की ठान ली।
मंजुघोषा ऋषि के पास ही बैठकर वीणा बजाने और गाने लगी, जिसमें कामदेव ने भी उसकी मदद की। उसकी सुंदरता और मधुर संगीत के प्रभाव से मेधावी ऋषि की तपस्या भंग हो गई और वे अपनी साधना भूलकर उसके साथ रहने लगे।
समय का पता ही नहीं चला। जब काफी समय बाद मंजुघोषा ने स्वर्ग वापस जाने की अनुमति मांगी, तब ऋषि को एहसास हुआ कि उनके 57 साल बीत चुके हैं। अपनी तपस्या खराब होने से ऋषि को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने मंजुघोषा को श्राप दे दिया कि वह पिशाचिनी बन जाए। अप्सरा यह सुनकर बहुत दुखी हुई और उसने माफी मांगी।
तब ऋषि का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने उसे पापमोचनी एकादशी का व्रत रखने का सुझाव दिया। मेधावी ऋषि ने भी अपने पिता च्यवन ऋषि की सलाह पर इसी व्रत का पालन किया। इस व्रत के प्रभाव से मंजुघोषा पिशाच योनि से मुक्त होकर वापस स्वर्ग लौट गई और मेधावी ऋषि के भी सारे पाप धुल गए।
Papmochani Ekadashi 2026 Mahatva: पापमोचनी एकादशी का धार्मिक महत्व



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