अन्ना यूनिवर्सिटी की छात्रा के कथित यौन उत्पीड़न में एफआईआर लीक
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मद्रास हाई कोर्ट के 28 दिसंबर के आदेश के कुछ हिस्सों पर रोक लगा दी, जिसमें अन्ना यूनिवर्सिटी की छात्रा के कथित यौन उत्पीड़न में एफआईआर के लीक होने और पीड़िता की पहचान के संबंध में चेन्नई पुलिस आयुक्त और अन्य अधिकारियों के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी शामिल है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने एफआईआर लीक की विभागीय जांच करने के हाई कोर्ट के निर्देश पर भी अगले आदेश तक रोक लगा दी। कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश के पैराग्राफ 20, 21, 23 और 29(9) सहित उन हिस्सों पर रोक लगा दी, जहां पुलिस की ओर से चूक का उल्लेख किया गया था। पैराग्राफ 29(9) में, उच्च न्यायालय ने राज्य और गृह सचिव को संबंधित सेवा नियमों के तहत चूक, लापरवाही और कर्तव्य की उपेक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का निर्देश दिया था।
उच्च न्यायालय के फैसले का विरोध
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की चूक के संबंध में उच्च न्यायालय द्वारा की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने की मांग करने वाली तमिलनाडु की याचिका पर भी नोटिस जारी किया। पीठ ने स्पष्ट किया कि मामले के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) अपनी जांच जारी रखेगा। सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और सिद्धार्थ लूथरा ने तर्क दिया कि एफआईआर और पीड़िता के विवरण का लीक होना केंद्र द्वारा प्रबंधित अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम (सीसीटीएनएस) में “तकनीकी गड़बड़ी” के कारण हुआ था। रोहतगी ने बताया कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) से भारतीय न्याय संहिता, 2023 में स्थानांतरण के कारण एफआईआर अनजाने में उजागर हो गई थी। उन्होंने आगे कहा कि राज्य और पुलिस मामले के लिए एक महिला एसआईटी गठित करने के उच्च न्यायालय के फैसले का विरोध नहीं कर रहे थे।
इंजीनियरिंग छात्रा का कथित यौन उत्पीड़न
उच्च न्यायालय ने पहले पुलिस आयुक्त की इस मामले पर बिना किसी पूर्व सरकारी मंजूरी के प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने के लिए आलोचना की थी, जिसमें कहा गया था कि इस तरह की घटना से बचना चाहिए था। इसने एफआईआर लीक को पुलिस की गंभीर चूक भी बताया, जिससे पीड़िता और उसके परिवार को आघात पहुंचा। इसके अलावा, उच्च न्यायालय ने एफआईआर के असंवेदनशील शब्दों की भी आलोचना की, जिसके बारे में उसने कहा कि इससे पीड़िता को दोषी ठहराने को बढ़ावा मिलता है। 24 दिसंबर, 2024 को चेन्नई में अन्ना विश्वविद्यालय परिसर के अंदर एक दूसरे वर्ष की इंजीनियरिंग छात्रा का कथित यौन उत्पीड़न हुआ।


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