Delhi : भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने नीति आयोग के सहयोग से मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान ‘अनलॉकिंग ग्रोथ इन टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी सेक्टर’ शीर्षक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र में कारोबार को आसान बनाने, नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल करने, निवेश आकर्षित करने तथा सतत विकास को गति देने के लिए व्यापक रोडमैप प्रस्तुत किया गया है।
रिपोर्ट का विमोचन केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा, पर्यटन मंत्रालय के सचिव भुवनेश कुमार तथा अतिरिक्त सचिव सुमन बिल्ला ने संयुक्त रूप से किया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि पर्यटन भारत की अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय विकास का एक प्रमुख आधार बन सकता है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ उद्योग जगत के बीच बेहतर समन्वय, पर्यटन अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण, निजी निवेश को बढ़ावा तथा कारोबार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहन, समुदायों की भागीदारी बढ़ाने और सतत पर्यटन को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया।
रिपोर्ट में होटल, होमस्टे, रेस्तरां एवं खाद्य सेवाएं, टूर ऑपरेटरों तथा पर्यटन अवसंरचना परियोजनाओं से जुड़े मौजूदा नियमों और प्रक्रियाओं का विस्तृत अध्ययन किया गया है। इसमें निवेश, परियोजनाओं के क्रियान्वयन, आवास क्षमता बढ़ाने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय में आने वाली प्रमुख नियामकीय बाधाओं की पहचान की गई है।
कई महत्वपूर्ण सिफारिशें…
इन चुनौतियों के समाधान के लिए रिपोर्ट में स्वीकृति और लाइसेंस संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाने, अनुपालन संबंधी बोझ कम करने, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने, आवास क्षमता का विस्तार करने, पर्यटन आधारित उद्यमिता को प्रोत्साहित करने तथा पर्यटन अवसंरचना के तेजी से विकास और निजी निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने जैसी कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं।
केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के अनुरूप तैयार की गई यह रिपोर्ट पर्यटन क्षेत्र को आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और संतुलित क्षेत्रीय विकास का मजबूत माध्यम बनाने पर केंद्रित है। साथ ही इसका उद्देश्य भारत को सतत, समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना भी है।
राष्ट्रीय कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों, उद्योग संगठनों, होटल एवं आतिथ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों, ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म, शैक्षणिक संस्थानों, नॉलेज पार्टनर्स तथा विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यशाला के दौरान पर्यटन निवेश, नियामकीय सुधार, आवास क्षमता विस्तार, पर्यावरणीय स्थिरता तथा ‘विकसित भारत 2047’ के तहत पर्यटन आधारित विकास की रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई।
कार्यशाला का समापन इस साझा संकल्प के साथ हुआ कि केंद्र, राज्य सरकारें और उद्योग जगत मिलकर भारत में ऐसा पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करेंगे, जो निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल, प्रक्रियाओं के लिहाज से सरल और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो तथा देश की दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति में पर्यटन क्षेत्र की भूमिका को और मजबूत बनाए।


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