जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामा, भाजपा विधायकों ने ‘वेल’ में जाकर नकली कार्यवाही की

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श्रीनगर, 28 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में उस समय हंगामा हुआ जब भाजपा सदस्यों ने राज्य का दर्जा तुरंत बहाल करने के प्रस्ताव का विरोध जारी रखा। उनका कहना था कि प्रस्ताव की भाषा मंजूर करने लायक नहीं है और स्पीकर को हटा दिया जाना चाहिए। पार्टी ने विधानसभा में सदन के स्पीकर अब्दुल रहीम राथर को हटाने के लिए एक नोटिस पेश किया। सोमवार को उनके जोर देने के बावजूद जब राथर ने कुर्सी छोड़ने से इनकार कर दिया, तो भाजपा सदस्य सदन के ‘वेल’ (बीच के हिस्से) में चले गए और नकली कार्यवाही की। दिन की शुरुआत में,…

श्रीनगर, 28 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में उस समय हंगामा हुआ जब भाजपा सदस्यों ने राज्य का दर्जा तुरंत बहाल करने के प्रस्ताव का विरोध जारी रखा। उनका कहना था कि प्रस्ताव की भाषा मंजूर करने लायक नहीं है और स्पीकर को हटा दिया जाना चाहिए।

पार्टी ने विधानसभा में सदन के स्पीकर अब्दुल रहीम राथर को हटाने के लिए एक नोटिस पेश किया। सोमवार को उनके जोर देने के बावजूद जब राथर ने कुर्सी छोड़ने से इनकार कर दिया, तो भाजपा सदस्य सदन के ‘वेल’ (बीच के हिस्से) में चले गए और नकली कार्यवाही की।

दिन की शुरुआत में, जब सत्र शुरू हुआ, तो भाजपा के आरएस पठानिया ने स्पीकर को बताया कि पार्टी ने राथर को कुर्सी से हटाने के लिए एक नोटिस भेजा है। स्पीकर ने कहा कि उन्होंने नोटिस नहीं देखा है और सदन की प्रक्रिया के अनुसार, इस प्रस्ताव को 14 दिनों के बाद लिस्टिंग के लिए विचार किया जाएगा।

स्पीकर की बात सुनने के बाद भाजपा विधायकों ने विधानसभा में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया और सदन के बीचों-बीच (वेल में) आ गए। भाजपा विधायकों ने स्पीकर से कुर्सी छोड़ने की मांग करते हुए नारे लगाए। उन्होंने कुर्सी की तरफ कागज फेंके और विरोध प्रदर्शन के दौरान कामकाज से जुड़े कागज फाड़ दिए।

इसके बाद, जब हंगामा जारी रहा, तो भाजपा सदस्यों ने सदन के बीचों-बीच (वेल में) ही नकली कार्यवाही की।

यह विरोध मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए पेश किए गए प्रस्ताव की शब्दावली को लेकर था। पार्टी को विधानसभा के साल 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव और नवंबर 2024 में जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति से जुड़े प्रस्ताव के जिक्र पर आपत्ति थी।

भाजपा ने कहा है कि वह राज्य का दर्जा बहाल करने का समर्थन करती है, लेकिन इस मांग को स्वायत्तता, अनुच्छेद 370 और पहले की संवैधानिक व्यवस्थाओं के संदर्भों से जोड़ने पर उसे आपत्ति है।

हंगामे के दौरान डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी ने सरकार का पक्ष रखा और कार्यवाही पर भाजपा की आपत्ति पर सवाल उठाए। हंगामे के बावजूद, स्पीकर ने सदन की कार्यवाही जारी रखी और शोर-शराबे के बीच प्रश्नकाल चला।

बाद में सदन में स्वायत्तता प्रस्ताव पर बहस शुरू हुई और एनसी सदस्यों ने इसके पक्ष में बात रखी। एक अलग बात यह रही कि विपक्षी पार्टी पीपल्स कॉन्फ्रेंस (पीसी) के अध्यक्ष और विधायक सज्जाद गनी लोन ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा लाए गए राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव का समर्थन किया।

–आईएएनएस

एएसएच/पीएम

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IANS Agency

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