गुवाहाटी में त्रिपक्षीय वार्ता के बाद प्रमुख नागा संगठन ने मणिपुर में चार महीने से जारी नाकाबंदी समाप्त की

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इंफाल, 26 सितंबर (आईएएनएस)। मणिपुर में नागा जनजातियों के सर्वोच्च संगठन, यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) ने शनिवार को असम के गुवाहाटी में केंद्र और मणिपुर सरकार के साथ हुई त्रिपक्षीय बैठक के बाद राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगभग चार महीने से जारी अपनी आर्थिक नाकाबंदी समाप्त करने की घोषणा की। मणिपुर गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, मणिपुर में मौजूदा कानून व्यवस्था और संबंधित शांति स्थापना उपायों के तहत गुवाहाटी के पास गरभंगा स्थित बीएसएफ गुवाहाटी फ्रंटियर मुख्यालय में यूएनसी के साथ त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की गई थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) और मणिपुर सरकार के अधिकारियों…

इंफाल, 26 सितंबर (आईएएनएस)। मणिपुर में नागा जनजातियों के सर्वोच्च संगठन, यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) ने शनिवार को असम के गुवाहाटी में केंद्र और मणिपुर सरकार के साथ हुई त्रिपक्षीय बैठक के बाद राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगभग चार महीने से जारी अपनी आर्थिक नाकाबंदी समाप्त करने की घोषणा की।

मणिपुर गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, मणिपुर में मौजूदा कानून व्यवस्था और संबंधित शांति स्थापना उपायों के तहत गुवाहाटी के पास गरभंगा स्थित बीएसएफ गुवाहाटी फ्रंटियर मुख्यालय में यूएनसी के साथ त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की गई थी।

केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) और मणिपुर सरकार के अधिकारियों के साथ-साथ यूएनसी के नेताओं ने भी इस महत्वपूर्ण बैठक में भाग लिया।

बैठक के बाद, यूएनसी अध्यक्ष एनजी लोरहो ने एक बयान में कहा कि गुवाहाटी में मणिपुर सरकार, भारत सरकार और यूएनसी के बीच हुई त्रिपक्षीय वार्ता में हुए समझौते के बाद परिषद ने शनिवार शाम 6 बजे से मौजूदा आर्थिक नाकाबंदी को स्थगित करने का फैसला किया है।

बयान में कहा गया कि यूनाइटेड नागा काउंसिल आंदोलन के दौरान सभी संबंधित पक्षों द्वारा दिए गए सहयोग और एकजुटता की सराहना करती है।

इम्फाल-जिरिबाम राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-37) और इम्फाल-दिमापुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-2) मणिपुर की दो महत्वपूर्ण जीवन रेखाएं हैं, जो इस भू-आबद्ध पूर्वोत्तर राज्य को देश के शेष भाग से जोड़ती हैं।

कंगपोकपी जिले के लेइलोन वाइफेई गांव से छह नागा नागरिकों के अपहरण के बाद मई में यूएनसी द्वारा नाकाबंदी लागू की गई थी। इस जिले में मुख्य रूप से कुकी-जो आदिवासी रहते हैं। अपहृत छह नागा ग्रामीणों के शव 10 जून को बरामद किए गए, जिससे मणिपुर के विभिन्न हिस्सों में व्यापक आक्रोश और आंदोलन भड़क उठे।

नाकाबंदी ने राज्य में आवश्यक वस्तुओं और ईंधन के परिवहन को बुरी तरह प्रभावित किया और विभिन्न वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हुई। लंबे समय तक चले इस व्यवधान ने मणिपुर के नागा-बहुल क्षेत्रों से गुजरने वाले प्रमुख राजमार्गों पर वाहनों और आपूर्ति की आवाजाही को भी प्रभावित किया।

शनिवार को गुवाहाटी में हुई बैठक का विशेष महत्व है क्योंकि नाकाबंदी ने दो प्रमुख राजमार्गों पर आवागमन को बाधित कर दिया था, जिससे राज्य के बाहर से मणिपुर में आवश्यक वस्तुओं के परिवहन पर असर पड़ा था।

केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और प्रमुख नागा नागरिक समाज संगठनों के बीच हुई त्रिपक्षीय बैठक को राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने और व्यापक शांति-निर्माण प्रयासों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

गुवाहाटी में यह बैठक यूएनसी और अन्य नागा नागरिक समाज संगठनों द्वारा छह नागा नागरिकों के अपहरण और उसके बाद हुई हत्या की मांगों को लेकर कई महीनों से जारी नाकाबंदी के बाद हुई।

यूएनसी ने पहले कहा था कि छह नागरिकों की मौत और नागा संगठनों द्वारा उठाए गए अन्य मुद्दों पर कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

–आईएएनएस

एमएस/

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IANS Agency

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