सीजेआई को लेकर सोशल मीडिया पोस्ट पर विवाद, सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेकर अवमानना की कार्रवाई की मांग

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नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस केरल यूनिट के एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत से इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की है। लाैदरअसल, कांग्रेस केरल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट किया था, जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया। पोस्ट में लिखा था, “डियर सूर्यकांत, अगर कानून-व्यवस्था संभालना आपके बस की बात नहीं है, तो अभी इस्तीफा दे दें। हम आपकी जगह किसी ऐसे व्यक्ति को ले आएंगे जो इसे संभाल सके।”…

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस केरल यूनिट के एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत से इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की है।

लाैदरअसल, कांग्रेस केरल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट किया था, जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया। पोस्ट में लिखा था, “डियर सूर्यकांत, अगर कानून-व्यवस्था संभालना आपके बस की बात नहीं है, तो अभी इस्तीफा दे दें। हम आपकी जगह किसी ऐसे व्यक्ति को ले आएंगे जो इसे संभाल सके।”

इस पोस्ट को लेकर वकील विनीत जिंदल ने सीजेआई को शिकायत दी है। उन्होंने कहा है कि इस पोस्ट और सुप्रीम कोर्ट परिसर में हुए प्रदर्शन और नारेबाजी की जांच की जानी चाहिए कि क्या यह कानून के तहत कार्रवाई योग्य है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा और सुचारू कामकाज को लेकर भी चिंता जताई है।

विनीत जिंदल ने अपनी शिकायत में कहा कि इस पोस्ट की पूरी तथ्यात्मक और कानूनी संदर्भ में जांच होनी चाहिए, ताकि तय हो सके कि यह वैध राजनीतिक आलोचना के दायरे में है या यह अवमानना अधिनियम 1971 की धारा 2(सी) के तहत आता है।

उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 129 का हवाला दिया, जो सुप्रीम कोर्ट को अपनी अवमानना के लिए सजा देने का अधिकार देता है। उन्होंने मांग की कि अगर जरूरी हो तो स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई की जाए।

वकील ने यह भी मांग की है कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य इंडिया ब्लॉक नेताओं द्वारा याचिका दायर करने के दौरान हुए प्रदर्शन की भी जांच हो। यह देखा जाए कि क्या किसी प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश किया गया, सुरक्षा निर्देशों का उल्लंघन हुआ या शीर्ष अदालत के काम में बाधा डाली गई।

विनीत जिंदल ने कहा कि कोई भी निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित सीसीटीवी फुटेज, एक्सेस-कंट्रोल लॉग, सुरक्षा रिकॉर्ड और अन्य सबूतों को सुरक्षित रखा जाना चाहिए और उनकी जांच होनी चाहिए।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) ने भी सीजेआई के इस्तीफे की मांग वाले बयानों की निंदा की थी और चेतावनी दी थी कि ऐसी टिप्पणियां न्यायपालिका की गरिमा को कमजोर करती हैं और न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करती हैं।

बता दें कि इंडिया ब्लॉक ने सोमवार को चुनावी अनियमितताओं और एसआईआर के प्रक्रिया के खिलाफ मार्च किया था। इसके बाद विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनावी सूची संशोधन प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक संयुक्त याचिका दायर की थी।

इस मामले में वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को हुई घटना को लेकर भी संपर्क किया है, जब राहुल गांधी सहित लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को चुनौती देने वाली याचिका दायर करने के लिए रजिस्ट्री पहुंचे थे। जब वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने मंगलवार को इस मामले का जिक्र किया, तो सीजेआई ने पूछा, “क्या यह मेंशनिंग लिस्ट में है?” भाटिया के ना कहने पर सीजेआई ने कहा, “कल मेंशन करना।”

–आईएएनएस

वीकेयू/पीएम

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IANS Agency

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