चंडीगढ़, 15 मार्च (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (अखिल भारतीय प्रतिनिधियों की सभा) की तीन-दिवसीय बैठक रविवार को संपन्न हो गई। इस बैठक में जाति-आधारित भेदभाव को खत्म करने और चुनावों के दौरान मतदाताओं के जनसांख्यिकीय आंकड़ों का जाति-आधारित विश्लेषण करने की प्रथा को रोकने का आह्वान किया गया।
आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबले ने हरियाणा के पानीपत जिले के समालखा में मीडिया वालों से कहा कि संघ सामाजिक सद्भाव का समर्थन करता है और समाज को जाति के आधार पर बांटने की कोशिशों का विरोध करता है।
होसबले ने मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक हालात के बीच केंद्र सरकार की कूटनीतिक कोशिशों की भी तारीफ की, और कहा कि संघ ‘वैश्विक शांति और विकास का समर्थक है’।
उन्होंने कहा कि आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने इस संगठन की स्थापना किसी खास समुदाय, धार्मिक संप्रदाय या पूजा-पद्धति का विरोध करने के इरादे से नहीं की थी।
उन्होंने कहा, “पूजा-पद्धति और रीति-रिवाजों में अंतर से कोई बुनियादी फर्क नहीं पड़ता।”
यह कहते हुए कि संगठन में सभी का स्वागत है, होसबले ने कहा, “हम समाज की भलाई के लिए रचनात्मक काम में लगे किसी भी व्यक्ति को संघ का स्वयंसेवक (वॉलंटियर) मानते हैं।”
संगठन की गतिविधियों के विस्तार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में संघ के काम में काफी बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने कहा, “शाखाओं (ब्रांचों) की संख्या लगभग 6,000 बढ़ी है, जो 88,000 के आंकड़े को पार कर गई है, जबकि जिन जगहों पर ये काम करती हैं, उनकी संख्या बढ़कर 55,000 से ज्यादा हो गई है। साप्ताहिक बैठकों और स्टडी सर्कल की संख्या भी बढ़ी है।”
होसबले ने कहा कि संगठन का विस्तार अंडमान द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश, लेह और दूरदराज के आदिवासी इलाकों जैसे क्षेत्रों में संघ की शाखाओं के काम करने के तरीके से भी साफ दिखता है।
उन्होंने आगे कहा, “यह विस्तार संघ के शताब्दी वर्ष के मौके पर आयोजित किए जा रहे अलग-अलग कार्यक्रमों में भी झलकता है।”
देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अंडमान द्वीप समूह में एक हिंदू सम्मेलन में नौ अलग-अलग द्वीपों से 13,000 से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया, और इसमें सरसंघचालक मोहन भागवत भी शामिल हुए।
उन्होंने कहा, “इसी तरह, अरुणाचल प्रदेश जैसे कम आबादी वाले राज्य में, 37,000 से ज्यादा लोगों ने स्वदेशी आध्यात्मिक परंपराओं पर आधारित 21 सम्मेलनों में हिस्सा लिया।”
होसबले के मुताबिक, संगठन के विस्तार के साथ-साथ संघ समाज में जीवन की गुणवत्ता और चरित्र को बेहतर बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है। उन्होंने कहा, “पंच परिवर्तन (पांच बदलाव) की अवधारणा के माध्यम से सकारात्मक सामाजिक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करना बहुत जरूरी है। भारतीय लोकाचार, या हिंदुत्व, केवल एक विचारधारा नहीं है, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है। जीवन जीने के इस तरीके के जरिए, पूरे समाज के स्तर को ऊपर उठाना चाहिए।”
होसबले ने यह भी कहा कि समाज को जाति और धर्म के भेदभाव से ऊपर उठकर महान हस्तियों के योगदान का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहादत वर्षगांठ के मौके पर, आरएसएस स्वयंसेवकों ने पूरे देश में 2,000 से ज्यादा कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें 7 लाख से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया।
उन्होंने आगे कहा कि इसी तरह, राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ भी पूरे उत्साह के साथ मनाई गई।
संघ के नियमित प्रशिक्षण शिविरों के बारे में जानकारी देते हुए, होसबले ने कहा कि 11 क्षेत्रों में 96 प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे, साथ ही नागपुर में भी एक शिविर होगा।
मीडियाकर्मियों के एक सवाल का जवाब देते हुए, उन्होंने कहा कि संगठनात्मक ढांचे के भीतर विकेंद्रीकरण की अवधारणा पर भी चर्चा की गई है।
उन्होंने बताया, “इसमें मौजूदा ‘प्रांत’ (प्रांतीय) इकाइयों को ‘संभाग’ (क्षेत्र) के नाम से जाने जाने वाले छोटे प्रशासनिक डिवीजनों से बदलने का प्रस्ताव शामिल है। अगर इसे लागू किया जाता है, तो मौजूदा 46 प्रांतों की जगह 80 से ज्यादा ऐसे क्षेत्र बन जाएंगे।”
तीन दिवसीय आरएसएस अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा, जो संगठन की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है, में 1,489 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
32 संबद्ध संगठनों के प्रतिनिधि, जिनमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत शामिल थे, भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे।
–आईएएनएस
एससीएच
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