नई दिल्ली, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी, आप नेता अरविंद केजरीवाल और सीजेपी पर राजनीतिक हितों के लिए राजधानी के निवासियों की शांति और सुरक्षा में खलल डालने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि उन्हें शहर को बंधक नहीं बनाने दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लिखा कि लोकतंत्र की आड़ में अराजकता फैलाने और जनता के जनादेश को चुनौती देने वाली राजनीति के खिलाफ डटकर लड़ाई लड़ी जाएगी। यह बात साफ है: दिल्ली को बंधक नहीं बनने दिया जाएगा।
उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में किसी को भी अराजकता न फैलाने देने का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देशवासियों द्वारा नकारे जा चुके नेता राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल, अपनी ‘बी-टीम’ सीजेपी के साथ मिलकर दिल्ली को युद्ध का मैदान बनाना चाहते हैं।
सीएम रेखा गुप्ता ने एक्स पोस्ट में लिखा, “देशवासियों द्वारा रिजेक्टेड नेता राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल, अपनी बी-टीम सीजेपी के साथ मिलकर दिल्ली को अखाड़ा बनाना चाहते हैं। आखिर ये नेता, अपनी नॉनस्टॉप हार की खीझ, जनता पर उतारने पर क्यों तुले हैं? सड़कों पर अव्यवस्था से परेशान होने वाले दिल्लीवासियों का क्या दोष है?”
उन्होंने कहा, “काम पर जाने वाले कर्मचारियों, रोज कमाकर परिवार चलाने वाले श्रमिकों और अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की परेशानी की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या आपकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं दिल्ली के लाखों परिवारों की रोजी-रोटी, सुरक्षा और शांति से भी बड़ी हैं?”
सीएम ने आगे कहा, “दिल्ली ने विकास के लिए वोट दिया। जनता के अभूतपूर्व आशीर्वाद के कारण नरेंद्र मोदी, भारत की निर्वाचन राजनीति के इतिहास में, लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने वाले नेता बने। लेकिन परिवारवाद और अवसरवाद से ग्रसित दल, इस जनसमर्थन को हजम ही नहीं कर पा रहे। अराजकता के साधक और खुद को दिल्ली का मालिक की उपाधि देने वाले अरविंद केजरीवाल, राजनीतिक स्वार्थ के लिए दिल्लीवासियों की शांति और सुरक्षा को भंग करने का प्रयास कर रहे हैं। ज्ञात रहे, दिल्ली बंधक बनाने की छूट नहीं मिलेगी। लोकतंत्र की आड़ में अराजकता फैलाने और जनादेश को चुनौती देने की राजनीति का डटकर मुकाबला होगा।”
अधिकारियों के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी के अलग-अलग हिस्सों से एक हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। ये लोग सीजेपी की ओर से बुलाए गए उस विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे, जिसमें वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (एसआईआर) में कथित गड़बड़ियों को लेकर सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी।
इस विरोध प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में 30 हजार से ज्यादा पुलिस और पैरामिलिट्री जवान तैनात किए गए थे। जंतर-मंतर के आस-पास 45 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए, सेंट्रल दिल्ली में इंटरनेट पर रोक लगाई गई, बैरिकेड्स लगाए गए और सुबह 6 बजे से सेंट्रल दिल्ली के कई रास्तों पर ट्रैफिक पर पाबंदियां लगाई गईं। साथ ही, स्कूलों, कॉलेजों और अदालतों को उस दिन के लिए ऑनलाइन मोड में काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
–आईएएनएस
पीएसके
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