India UNSC : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की वकालत करते हुए भारत ने एक बार फिर अपना सैद्धांतिक और स्पष्ट रुख दुनिया के सामने रखा है। UN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पार्वथानेनी ने कहा कि जब तक सुरक्षा परिषद में ‘वीटो’ का प्रावधान मौजूद है, तब तक पुनर्गठित काउंसिल के सभी स्थायी सदस्यों को यह अधिकार मिलना चाहिए।
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की इंटर-गवर्नमेंटल नेगोशिएशंस की बैठक के दौरान उन्होंने जोर देकर कहा कि निष्पक्षता और न्याय का मांग यही है कि सभी स्थायी सदस्यों के पास समान अधिकार और जिम्मेदारियां हों।
‘वीटो के बिना सेकंड-क्लास मेंबर बनने जैसा’
बैठक में ‘क्वेश्चन ऑफ द वीटो’ पर बोलते हुए भारतीय राजदूत ने चेतावनी दी कि अगर वीटो पावर दिए बिना केवल नए स्थायी सदस्य जोड़े जाते हैं, तो यह उन्हें सुरक्षा परिषद में ‘सेकंड-क्लास सदस्य’ बनाने जैसा होगा। इससे P5 (चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका) के प्रभुत्व वाले फैसले लेने के तंत्र में कोई बदलाव नहीं आएगा।
भारत ने हमेशा सुरक्षा परिषद की स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार की मांग की है। नई दिल्ली का मानना है कि 1945 में स्थापित यह वैश्विक निकाय 21वीं सदी की आधुनिक भू-राजनीतिक वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व नहीं करता और इसमें तत्काल बदलाव जरूरी है।
2028-29 कार्यकाल के लिए भी दावेदारी में भारत
भारत सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट का हकदार तो है ही, साथ ही वह 2028-29 कार्यकाल के लिए गैर-स्थायी सीट भी मांग रहा है। अगले साल जून में होने वाले चुनाव में एशिया-पैसिफिक ग्रुप की इकलौती सीट के लिए भारत और तजाकिस्तान आमने-सामने होंगे। इससे पहले भारत 2021-22 में अपनी 8वीं पारी पूरी कर चुका है।
यह भी पढ़ें – चाइल्ड पोर्नोग्राफी और डीपफेक पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का बयान, बनाई जा रही नई पोलिसी


Download Android App
Download iOS App



