नई दिल्ली, 29 सितंबर (आईएएनएस)। राजद सांसद मनोज झा ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की उस टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि विपक्ष चुनाव हारने के बाद चुनाव आयोग पर सवाल उठाता है और यह उसका दोहरा चरित्र है। मनोज झा ने कहा कि इस बार चुनाव आयोग पर सवाल विपक्ष ने नहीं बल्कि मीडिया की खोजी पत्रकारिता ने उठाए हैं।
राजद सांसद मनोज झा ने कहा, “विपक्ष ने सवाल नहीं उठाया बल्कि मीडिया ने जांच की और सबूतों के साथ तथ्य सामने रखे। उसके बाद हम क्या करें, ऑर्केस्ट्रा में शामिल हो जाएं? ‘राजा तेरी सुबह की जय, राजा तेरी शाम की जय’ की तर्ज पर डफली बजाने लगें? अगर विपक्ष पर आरोप लगाना भी है तो सबूतों के साथ लगाइए। यह तरीका उचित नहीं है।”
इंडिया गठबंधन की बैठक में अखिलेश यादव के शामिल न होने के सवाल पर मनोज झा ने कहा कि अखिलेश यादव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और उन्होंने अपने प्रतिनिधि को भेजने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा, “वे खुद शामिल नहीं हो रहे हैं बल्कि उनके स्थान पर कौन शामिल होगा, यह तय करना उन्हीं का अधिकार है। यह खबर मीडिया के एक हिस्से के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है क्योंकि उन्हें सरकार के पक्ष में हेडलाइन मैनेजमेंट करना है। जमीनी स्तर पर इसका कोई असर नहीं है।”
उज्जैन में शाही मस्जिद को लेकर गहराते विवाद और हाईकोर्ट द्वारा तोड़ने के आदेश पर रोक न लगाए जाने के सवाल पर मनोज झा ने इसे ‘डॉग व्हिसल पॉलिटिक्स’ करार दिया। उन्होंने कहा, “मैं मानता हूं कि अगर इस तरह की कोई भी कार्रवाई डॉग व्हिसल पॉलिटिक्स के नजरिए से की जा रही है तो यह उचित नहीं है। आप क्या कर रहे हैं? आप अदरिंग कर रहे हैं, एक समुदाय को निशाना बना रहे हैं।”
उन्होंने इस मुद्दे पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा देश की एकता को लेकर दिए बयान पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “मैं तो चाहूंगा कि इस तरह के सवाल मोहन भागवत जी से भी पूछे जाएं। वे न्यूयॉर्क में कितनी अच्छी-अच्छी बातें बोलकर आए हैं। क्या हिंदुस्तान आते ही सारी अच्छी बातें उन्होंने फ्लाइट में ही छोड़ दीं? यह सवाल उनसे भी पूछा जाना चाहिए।”
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के उस बयान पर कि भगवान राम अमीरों के भगवान हैं और भगवान शिव गरीबों के देवता हैं, मनोज झा ने कहा कि वह उनके वर्गीकरण पर टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, “मैं जिस इलाके से आता हूं, वहां भगवान शिव और देवी काली की प्राथमिकता है, मां तारा और शक्ति के अलग-अलग रूपों की उपासना होती है। यह हिंदू धर्म की विविधता ही है कि हर इलाके में लोगों ने अपनी आस्था के अनुसार ईश्वर की संकल्पना की है। यदि आप बंगाल-असम की ओर जाएंगे तो वहां देवी की उपासना की प्राथमिकता अधिक है। यह हिंदुस्तानी समाज और भारतवर्ष की एक वास्तविकता है और इस वास्तविकता को समझने की आवश्यकता है।”
–आईएएनएस
पीआईएम/पीएम
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