Om Birla No Confidence Motion:संसद में चल रहे बजट सत्र में ब्रेक लगने के बाद आज फिर से संसद की कार्यवाही शुरू हो रही है। आज लोकसभा में ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने की बात कही गई है। सदन में आज चर्चा का मुख्य विषय यही है। सदन की कार्यवाही स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष के द्वारा लाए गए एक औपचारिक प्रस्ताव पर चर्चा के साथ शुरू हो चुकी है। वहीं, बीजेपी की अगुवाई वाले NDA की सरकार विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर जवाबी हमले की तैयारी कर रही है।
विपक्ष क्यों ला रहा है अविश्वास प्रस्ताव?

कांग्रेस के अनुसार, इस प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। कांग्रेस के साथ समाजवादी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) समेत कई विपक्षी दलों ने इसका समर्थन किया है। पश्चिम बंगाल की रूलिंग पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने शुरू में नोटिस पर साइन करने में थोड़ी हिचकिचाहट की, लेकिन पार्टी ने कन्फर्म किया है कि उसके MPs इस प्रस्ताव का सपोर्ट करेंगे।
अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया है कि लोकसभा अध्यक्ष ने बार-बार उन्हें सदन में जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने का अवसर नहीं दिया। विपक्ष ने बिरला पर पूरी तरह से पार्टीबाज़ी’ करने का भी आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि इसके चलते ही उन्हें लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का कदम उठाना पड़ा।
विपक्षी दलों ने लोकसभा महासचिव को ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा है। विपक्षी पार्टियों ने नियम 94 (C) के तहत स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए यह अविश्वास प्रस्ताव दिया है।
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और वोटिंग की प्रक्रिया
अगर चेयर (स्पीकर) के बुलाने पर सदन में 50 सदस्य खड़े हो जाते हैं, तो अविश्वास प्रस्ताव को मंजूर माना जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव पर चर्चा होगी और फिर वोटिंग की प्रक्रिया होगी। लेकिन अगर 50 सदस्य नोटिस के समर्थन में खड़े नहीं होते हैं, तो प्रस्ताव को पेश नहीं किया जा सकेगा और उस पर चर्चा नहीं होगी।
इस बीच, बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों ने अपने-अपने सांसदों को व्हिप जारी किया है, ताकि जब यह मुद्दा सदन में विचार के लिए आए, तो उनके सभी सांसद सदन में मौजूद रहें और मतदान प्रक्रिया में भाग लें।
सदन में नहीं रहेंगे ओम बिरला?
स्पीकर ओम बिरला पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि जब तक उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक वह सदन में मौजूद नहीं रहेंगे।
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