Pakistani YouTube Channel Delhi Protest: दिल्ली में वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच सोशल मीडिया पर एक पाकिस्तानी चैनल की कवरेज और उसके प्रचार को लेकर सवाल उठाए गए हैं। भारतीय राजनीतिक टिप्पणीकार मिस्टर सिन्हा (@Mrsinha) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा कर पूछा कि दिल्ली के प्रदर्शन को कवर कर रहे पाकिस्तानी चैनल के समर्थन में कथित तौर पर इतने सारे पेड ट्वीट्स कैसे किए जा रहे हैं और इनके पीछे फंडिंग कौन कर रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मिस्टर सिन्हा ने अपनी पोस्ट में रेल और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव तथा गृह मंत्रालय को टैग किया। उन्होंने इस मामले पर ध्यान देने और कथित पेड प्रमोशन की जांच किए जाने की मांग उठाई। उनकी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या दिल्ली में हुए प्रदर्शनों की ऑनलाइन कवरेज को बढ़ावा देने के लिए किसी संगठित अभियान का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन, पोस्ट में उठाए गए सवालों से अपने आप यह साबित नहीं होता कि चैनल को किसी खास संगठन या व्यक्ति से फंडिंग मिली है। इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि सामने आना जरूरी है।
क्या है ‘Human Online’ चैनल का मामला?
पोस्ट के साथ शेयर की गई फोटो के अनुसार, ‘Human Online’ नाम का सोशल मीडिया अकाउंट (@HumanOnlineNews) दिल्ली में विपक्षी नेताओं के मार्च और प्रदर्शन से जुड़ी खबरें साझा कर रहा था। चैनल अपनी पोस्ट में घटनास्थल से सीधे जानकारी देने का दावा कर रहा था।
शेयर की गई अकाउंट जानकारी के मुताबिक, यह अकाउंट नवंबर 2024 में बनाया गया था और जनवरी 2025 में इसे वेरिफिकेशन मिला था। इसमें यह भी बताया गया कि अकाउंट ने 4 बार अपना यूजरनेम बदला और इसकी जानकारी पाकिस्तान के ऐप स्टोर से जुड़ी हुई है।
इन जानकारियों के आधार पर चैनल के संचालन और प्रचार को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, किसी अकाउंट की प्रोफाइल से जुड़ी जानकारी के आधार पर उसकी फंडिंग या किसी अभियान में उसकी भूमिका को अंतिम रूप से तय नहीं किया जा सकता।
So many paid tweets for this Pakistani youtube channel covering Delhi protest…… How was it allowed? And who’s funding the paid tweets?
@AshwiniVaishnaw @HMOIndia https://t.co/jm7rRLrLNy
— Mr Sinha (@Mrsinha) October 13, 2026
फर्जी पोस्ट और गलत जानकारी पर भी चिंता
दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलने का मुद्दा भी चर्चा में रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस ने भ्रामक पोस्ट और फर्जी कंटेंट के मामलों में कार्रवाई की है। रिपोर्ट में कम से कम चार एफआईआर दर्ज होने और करीब 500 भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट हटवाए जाने का दावा किया गया है।
बताया गया कि कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स पर पुराने दंगों और हिंसा से जुड़े वीडियो को संपादित करके दिल्ली के हालिया प्रदर्शनों से जोड़कर साझा किया गया। कुछ पोस्ट में कथित मौतों और पुलिस फायरिंग को लेकर भी अपुष्ट दावे किए गए थे।
ऐसी सामग्री लोगों के बीच भ्रम पैदा कर सकती है और कानून-व्यवस्था से जुड़ी स्थिति को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, इन मामलों में प्रत्येक पोस्ट की सत्यता और उसके पीछे की मंशा की पुष्टि जांच के आधार पर ही की जा सकती है।
100 से अधिक संदिग्ध अकाउंट्स पर नजर रखने का दावा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पुलिस और खुफिया एजेंसियां 100 से अधिक संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट्स पर नजर रख रही हैं। इनमें कुछ अकाउंट्स के सीमा पार से संचालित होने की आशंका जताई गई है। इन दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, पेड प्रमोशन के जरिए किसी खबर को अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। यदि इस तरीके का इस्तेमाल भ्रामक या अधूरी जानकारी फैलाने के लिए किया जाए, तो लोगों के लिए सही और गलत खबर के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है।
वोटर लिस्ट के मुद्दे पर हुआ था प्रदर्शन
दिल्ली में हालिया विरोध प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर लगाए गए आरोपों से जुड़े थे। इन प्रदर्शनों में विपक्षी दलों, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य समूहों की भागीदारी बताई गई थी। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था।
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