‘न्यायपालिका पर हमला’, NCERT किताब विवाद पर Supreme Court के CJI ने लगाई फटकार

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SC Hearing on NCERT Textbook Row: Supreme Court of India ने NCERT की कक्षा 8 की एक पाठ्यपुस्तक में ‘न्यायपालिका में करप्शन’ से जुड़े अध्याय को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने की, जिसमें जस्टिस जॉयमलया बागची और जस्टिस एम. पंचोली भी शामिल थे। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस कदम पर कड़ी नाराज़गी जताई और इसे न्यायपालिका पर ‘पहली गोली चलाने’ जैसा बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की सामग्री के कारण मीडिया में न्यायपालिका की छवि ‘रक्तरंजित’ दिखाई दे रही है, जो बेहद…

SC Hearing on NCERT Textbook Row: Supreme Court of India ने NCERT की कक्षा 8 की एक पाठ्यपुस्तक में ‘न्यायपालिका में करप्शन’ से जुड़े अध्याय को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने की, जिसमें जस्टिस जॉयमलया बागची और जस्टिस एम. पंचोली भी शामिल थे।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस कदम पर कड़ी नाराज़गी जताई और इसे न्यायपालिका पर ‘पहली गोली चलाने’ जैसा बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की सामग्री के कारण मीडिया में न्यायपालिका की छवि ‘रक्तरंजित’ दिखाई दे रही है, जो बेहद गंभीर चिंता का विषय है।

Supreme Court NCERT case: क्या है पूरा मामला?

बता दें कि एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े आपत्तिजनक उल्लेखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने इसे न्यायपालिका को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश करार दिया और बाजार से किताब को वापस लेने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी।

Class 8 Social Science book controversy: सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच की बात कही है और इससे एक दिन पहले ही किताब के खास चैप्टर पर आपत्ति जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि अदालत को बदनाम नहीं करने दिया जाएगा, हालांकि कोर्ट की आपत्ति के बाद एनसीईआरटी ने किताब फिर लिखने का फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट में एनसीईआरटी की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस सुओ मोटो केस में हम माफी मांगते हैं। इस पर सीजेआई ने कहा कि मीडिया में हमारे दोस्तों ने यह नोटिस भेजा और इसमें माफी का एक शब्द नहीं है।

NCERT judiciary chapter row: कोर्ट रूम में क्या-क्या हुआ? (SC Hearing on NCERT Textbook Row)

उन्होंने कहा, ‘यह हमारी संस्थागत जिम्मेदारी है कि हम यह पता लगाएं कि यह किताब में प्रकाशित हुआ था या नहीं। रजिस्ट्रार जनरल को भेजे गए संदेश में संबंधित विभाग इसका बचाव कर रहा था। यह एक गहरी साजिश थी। सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि चैप्टर तैयार करने वाले दो लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। वे कभी यूजीसी या किसी मंत्रालय के साथ काम नहीं कर सकेंगे।

इसके बाद सीजेआई ने कहा, ‘यह तो बहुत आसान होगा और वो बच निकलेंगे। उन्होंने गोली चलाई और न्यायपालिका का खून बह रहा है।’ तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि 32 कॉपी जो बाजार में गई थीं, उन्हें वापस ले लिया गया है और पूरी पुस्तक की समीक्षा की जाएगी।

इस पर सीजेआई ने टिप्पणी की कि केवल दो लोगों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। यह बहुत आसान होगा और वे बच निकलेंगे। यह पूरी न्यायपालिका को बदनाम करने की चाल है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या पुस्तक की कॉपियां अभी बाजार या ऑनलाइन उपलब्ध हैं। उसे भी जल्द वापस लिया जाए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ के सामने सीनियर वकील कपिल सिब्बल और डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने यह मुद्दा उठाया। सिब्बल ने कहा कि कक्षा 8 के बच्चों को जुडिशरी में करप्शन के बारे में पढ़ाया जाना चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि संस्था के सदस्य होने के नाते वे इससे परेशान हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संतुलन और स्वायत्तता सुनिश्चित की है। ऐसे में किसी एक संवैधानिक संस्था की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाली सामग्री बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की बातें युवाओं और अभिभावकों के मन में बैठ गईं तो न्यायिक संस्थाओं पर से भरोसा कम हो सकता है।

judicial corruption: CJI ने सघन जांच के दिए आदेश

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में गहन जांच की जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि इस सामग्री के प्रकाशन के पीछे कौन जिम्मेदार है। वहीं, सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया कि विवादित अध्याय हटाया जाएगा और संशोधित संस्करण दोबारा प्रकाशित किया जाएगा। अदालत ने दोहराया कि न्यायपालिका की साख से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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Shivangi Shandilya

शिवांगी शांडिल्य पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद हैं। गलगोटिया विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। IGNOU से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई जारी है। इस दौर में वेबसाइट पर लिखने का कार्य जारी है। पत्रकारिता की शुरुआत इंडिया न्यूज़ (इनखबर) से हुई, जहां बत्तौर हिन्दी सब-एडिटर के रूप में वेबसाइट पर काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्म लेने वाली शिवांगी की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है। शिवांगी को राजनीतिक घटनाक्रम पर आलेख लिखना बेहद पसंद है।