नई दिल्ली, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व इस साल 11 अक्टूबर, रविवार, से शुरू हो रहा है। इस दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त इन नौ दिनों में व्रत रखते हैं, माता की आराधना करते हैं और घर-परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। हर दिन मां के एक विशेष स्वरूप को समर्पित होता है और उस स्वरूप की अपनी अलग धार्मिक मान्यता है।
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है। मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, उनकी पूजा करने से भक्तों को शक्ति, स्थिरता और आत्मविश्वास का आशीर्वाद मिलता है। नवरात्रि की शुरुआत भक्त मां शैलपुत्री की आराधना से करते हैं।
दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। मां का यह स्वरूप तप, त्याग और संयम का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से व्यक्ति को धैर्य, आत्मबल और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित होने के कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। धार्मिक मान्यता में मां का यह स्वरूप साहस और शक्ति से जुड़ा है। उनकी आराधना से भय और परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। मां कूष्मांडा को ऊर्जा और सृजन शक्ति का स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि उनकी पूजा से घर में सुख-समृद्धि, खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है। उन्हें भगवान कार्तिकेय की माता माना जाता है। भक्त मां स्कंदमाता से बुद्धि, शांति और संतान सुख की कामना करते हैं। मां का यह स्वरूप ममता और वात्सल्य का प्रतीक भी माना जाता है।
छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। मां कात्यायनी को शक्ति और साहस का स्वरूप माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार उनकी पूजा से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना की जाती है। मां का यह स्वरूप देखने में उग्र माना जाता है, लेकिन भक्तों के लिए वे कल्याणकारी हैं। मान्यता है कि मां कालरात्रि की पूजा करने से भय दूर होता है और व्यक्ति को साहस मिलता है।
अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा होती है। मां महागौरी को शांति, पवित्रता और सौम्यता का स्वरूप माना जाता है। इस दिन कई घरों में कन्या पूजन भी किया जाता है। भक्त मां से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
नवरात्रि के नौवें और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री को सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी माना गया है। नवमी के दिन कई परिवारों में कन्या पूजन और हवन किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री की उपासना करने से भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति और कार्यों में सफलता का आशीर्वाद मिलता है।
इस तरह नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करके भक्त शक्ति, धैर्य, साहस, सुख-समृद्धि और शांति की कामना करते हैं।
–आईएएनएस
पीआईएम/एबीएम
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