उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश की घोसी लोकसभा सीट से सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण देने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। दरअसल, गठबंधन उम्मीदवार ने अपने खिलाफ दर्ज बलात्कार के एक मामले में 23 मई तक राहत देने की मांग की थी। न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की अवकाश पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, ‘‘यह रद्द करने वाला मामला नहीं है।’’
वाराणसी की एक कॉलेज छात्रा से बलात्कार करने के आरोपी एवं याचिकाकर्ता अतुल राय की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि घोसी में लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण में 19 मई को मतदान होना है। न्यायालय ने वकील से कहा, ‘‘यह रद्द किए जाने वाला मामला नहीं है। चुनाव लड़िये और यह मुकदमा भी।’’ पीठ ने यह भी कहा, ‘‘माफ करियेगा। आप रद्द करने की प्रक्रिया से बखूबी अवगत हैं।’’
गौरतलब है कि एक कॉलेज छात्रा की शिकायत पर राय के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। छात्रा ने आरोप लगाया है कि राय अपनी पत्नी से मिलाने के बहाने उसे घर ले गए लेकिन बाद में उसका यौन उत्पीड़न किया। हालांकि, राय ने बलात्कार के आरोपों से इनकार किया है। राय अपने खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से फरार है।
राय के वकील ने दलील दी कि दो अन्य अन्य मामलों में शिकायतकर्ता महिला ने इसी तरह के आरोप लगाए थे लेकिन बाद में दोनों मामलों में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। पीठ ने कहा, ‘‘आपने कागजात दाखिल नहीं किए हैं। हम नहीं जानते कि आप क्या कह रहे हैं।’’ जब वकील ने दलील दी कि राय के खिलाफ दर्ज मामला राजनीति से प्रेरित है, पीठ ने कहा, ‘‘यह बहुत अस्पष्ट है।’’ बहरहाल, इस विषय पर अब 27 मई को सुनवाई होगी। घोसी सीट उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में है।


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