Supreme Court NCERT Controversy Update: न्यायपालिका से जुड़े चैप्टर विवाद के बाद Supreme Court ने NCERT द्वारा दी गई बिना शर्त माफी को स्वीकार कर लिया है। साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस मामले की समीक्षा के लिए एक डोमेन एक्सपर्ट कमेटी का गठन करे। अदालत ने साफ किया कि भविष्य में ऐसे विवाद से बचने के लिए पाठ्यपुस्तकों की सामग्री की विशेषज्ञों से जांच जरूरी है।
Supreme Court NCERT Controversy Update: सुनवाई के दौरान सरकार ने दिया भरोसा

बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कोर्ट को आश्वस्त किया कि NCERT की सभी पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा कराई जाएगी। साथ ही यह भी कहा कि NCERT ने अदालत से बिना किसी शर्त के माफी मांग ली है। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि NCERT को सभी कक्षाओं की किताबों का रिव्यू करने का निर्देश दे दिया गया है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की गलत या विवादित जानकारी छात्रों तक न पहुंचे।
Supreme Court On NCERT: दोबारा लिखे गए चैप्टर पर भी कोर्ट की सख्ती

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उस अध्याय को दोबारा लिखे जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि अगर उस चैप्टर को फिर से लिखा जाता है, तो उसे तब तक प्रकाशित नहीं किया जाएगा जब तक विशेषज्ञ समिति उसकी जांच करके मंजूरी नहीं दे देती। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर एनसीईआरटी आने वाली पीढ़ी को न्यायपालिका के बारे में पढ़ाना चाहता है, तो यह चिंता की बात है कि बनाई गई समिति में एक भी विधि विशेषज्ञ या न्यायविद शामिल नहीं था। उन्होंने कहा कि इस तरह के संवेदनशील विषयों पर सामग्री तैयार करते समय विशेषज्ञों की भूमिका बेहद जरूरी होती है।
एक हफ्ते में बनेगी डोमेन एक्सपर्ट कमेटी

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह के भीतर डोमेन एक्सपर्ट कमेटी का गठन करे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस समिति में एक पूर्व न्यायाधीश, एक शिक्षा विशेषज्ञ और कानून के क्षेत्र का एक बड़ा जानकार शामिल होना चाहिए। यह समिति पाठ्यपुस्तकों की सामग्री की समीक्षा करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि छात्रों को दी जा रही जानकारी तथ्यात्मक और संतुलित हो।
Supreme Court NCERT Controversy Update: कुछ विशेषज्ञों को पाठ्यक्रम से किया गया बाहर
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 8 की विवादित किताब के अध्याय से जुड़े कुछ लोगों को भी स्कूल पाठ्यक्रम तैयार करने की प्रक्रिया से अलग करने का आदेश दिया। इनमें प्रोफेसर मिशेल डैनिनो, शिक्षिका सुपर्णा दिवाकर और कानूनी शोधकर्ता आलोक प्रसन्ना कुमार का नाम शामिल है। अदालत ने कहा कि फिलहाल इन लोगों को पाठ्यक्रम निर्माण से दूर रखा जाएगा। हालांकि अगर वे अदालत के इस आदेश में बदलाव चाहते हैं, तो वे कोर्ट में आवेदन दे सकते हैं।
सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे कंटेंट पर भी सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि वह उन सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की पहचान करे, जहां न्यायपालिका को लेकर भ्रामक या अपमानजनक सामग्री फैलाई जा रही है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले में सख्त रुख अपनाते हुए साफ संदेश दिया है कि शिक्षा से जुड़े विषयों में तथ्यात्मकता और जिम्मेदारी बेहद जरूरी है, खासकर तब जब बात देश की न्यायपालिका जैसी संवेदनशील संस्था की हो।
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