LPG किल्लत से टाइल्स पर संकट, गुजरात से सप्लाई ठप, 20% तक बढ़े दाम

Summary :

Tiles Industry Crisis: ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के चलते देश में गहराती एलपीजी किल्लत ने टाइल्स उद्योग को गंभीर संकट में धकेल दिया है। टाइल्स निर्माण में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाली एलपीजी गैस की कमी के कारण गुजरात की कई फैक्ट्रियों की रफ्तार थम गई है, जबकि कई इकाइयों में उत्पादन प्रभावित होने की वजह से उन्हें अस्थायी तौर पर बंद करना पड़ा है। इसका सीधा असर दिल्ली की टाइल्स मार्केटों पर साफ दिख रहा है, जहां पिछले एक महीने से टाइल्स की सप्लाई पूरी तरह ठप है। ऐसे में बाजार में टाइल्स की उपलब्धता तेजी से घट रही है…

Tiles Industry Crisis: ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के चलते देश में गहराती एलपीजी किल्लत ने टाइल्स उद्योग को गंभीर संकट में धकेल दिया है। टाइल्स निर्माण में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाली एलपीजी गैस की कमी के कारण गुजरात की कई फैक्ट्रियों की रफ्तार थम गई है, जबकि कई इकाइयों में उत्पादन प्रभावित होने की वजह से उन्हें अस्थायी तौर पर बंद करना पड़ा है। इसका सीधा असर दिल्ली की टाइल्स मार्केटों पर साफ दिख रहा है, जहां पिछले एक महीने से टाइल्स की सप्लाई पूरी तरह ठप है। ऐसे में बाजार में टाइल्स की उपलब्धता तेजी से घट रही है और कीमतों में करीब 20 फीसदी तक उछाल आ चुका है। व्यापारियों के अनुसार, अगले एक महीने तक सप्लाई ठप रहने की आशंका है। खासतौर पर मोरबी जैसे प्रमुख टाइल्स हब में सैकड़ों फैक्ट्रियों के बंद होने से पूरे देश की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो गई है, जिससे हालात और ज्यादा चिंताजनक बनते जा रहे हैं।

व्यापारियों की चुनौतियां और ग्राहकों की परेशानी

पूर्वी दिल्ली के जगतपुरी की टाइल्स मार्केट के व्यापारियों ने बताया कि युद्ध के कारण गुजरात से आने वाली टाइल्स की सप्लाई पिछले एक महीने से पूरी तरह ठप पड़ी है, जिससे बाजार में माल की भारी कमी हो गई है। ऐसे हालात में दुकानदारों को मजबूरन अपने पुराने स्टॉक के सहारे ही कारोबार चलाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि एक तरफ बिक्री लगातार घट रही है, वहीं दूसरी ओर दुकान का किराया, बिजली बिल और कर्मचारियों की सैलरी जैसी जिम्मेदारियां जस की तस बनी हुई हैं। बढ़ते खर्च और सीमित स्टॉक के चलते बाजार में टाइल्स के दाम बढ़ गए हैं, जिससे ग्राहक दुकानों पर आकर बहस कर रहे हैं। ग्राहक पुराने रेट का हवाला देकर नई कीमतों पर सवाल उठा रहे हैं। इतना ही नहीं, ग्राहकों को उनकी पसंद के डिजाइन की टाइल्स नहीं मिल रही है। जिन लोगों ने पहले किसी खास डिजाइन की टाइल खरीदी थी, वे अब उसी डिजाइन की कमी के कारण अपना निर्माण कार्य बीच में ही रोकने को मजबूर हैं। इससे न केवल ग्राहकों की परेशानी बढ़ी है, बल्कि व्यापारियों की बिक्री पर भी सीधा असर पड़ा है। जगतपुरी मार्केट के व्यापारी विकास चौहान का कहना है कि टाइल्स की कमी के चलते बाजार में ग्राहकों की संख्या दिन-प्रतिदिन घटती जा रही है। जिन घरों में निर्माण कार्य चल रहा था, वहां भी काम ठप पड़ने लगा है। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि जो लेबर पहले आसानी से मिल जा रही थी। अब वह सिलेंडर संकट की वजह से अपने-अपने घर जा रहे हैं।

टाइल्स की कीमतों में भारी बढ़ोत्तरी

टाइल्स के दामों में जबरदस्त उछाल टाइल्स की सप्लाई ठप होने का सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। व्यापारियों के अनुसार, सीमित स्टॉक के चलते अब पुराने माल अधिक दामों पर बिक रहा है। जहां एक महीने पहले 24×48 इंच वाली टाइल का बंडल 480 रुपये में मिलता था, वह अब बढ़कर करीब 600 रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह 12×18 इंच टाइल का बंडल 160 रुपये से बढ़कर 250 रुपये हो गया है, जबकि 12×24 इंच टाइल का बंडल 300 रुपये से बढ़कर 350 रुपये में मिल रहा है।

बिल्डरों पर बढ़ती लागत और निर्माण सामग्री का संकट

बिल्डरों पर भी पड़ा दोहरा असर इस संकट का असर केवल टाइल्स व्यापारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बिल्डरों के काम पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है। बिल्डर निखिल कपूर ने बताया कि युद्ध के चलते निर्माण सामग्री के दामों में तेजी से इजाफा हुआ है, जिससे कंस्ट्रक्शन की गतिविधियां धीमी पड़ गई हैं। सरिया के दामों में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, एक महीने पहले 310 रुपये में मिलने वाली सीमेंट की बोरी अब 360 रुपये में बिक रही है। 1200 रुपये का कॉपर का बंडल अब 2100 रुपये में बिक रहा है। इसके अलावा सेनेटरी आइटम्स के दाम भी बढ़ गए हैं, जिससे बिल्डरों का काम लगभग ठप पड़ गया है और उनकी लागत लगातार बढ़ती जा रही है।

ग्राहकों का घर बनाने का सपना अधूरा

ग्राहकों के सपनों पर लगा ब्रेक व्यापारियों का कहना है कि कई लोगों ने अपने घरों को लेकर खास योजनाएं बनाई थीं, लेकिन अब वे अधूरी रह गई हैं। अधिकांश ग्राहक पूरे घर में एक ही डिजाइन और पैटर्न की टाइल्स लगवाना चाहते थे, ताकि घर का लुक एकसमान और आकर्षक दिखे। लेकिन बाजार में एक जैसे डिजाइन की टाइल्स उपलब्ध न होने के कारण उन्हें मजबूरी में अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग डिजाइन की टाइल्स लगानी पड़ रही हैं। इससे न केवल उनके सपनों पर असर पड़ा है, बल्कि उनकी संतुष्टि भी कम हो गई है।

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Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।