तिलहन-दलहन उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का फोकस, रबी सम्मेलन में टिकाऊ खेती पर हुई चर्चा: मांगी लाल जाट

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नई दिल्ली, 29 सितंबर (आईएएनएस)। रबी सीजन की तैयारियों को लेकर आयोजित कृषि सम्मेलन में आत्मनिर्भरता को प्रमुख एजेंडा बनाया गया। सम्मेलन में तिलहन, दलहन और उर्वरक के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के साथ टिकाऊ कृषि, डिजिटल कृषि और जलवायु अनुकूल खेती पर विस्तार से चर्चा हुई। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक मांगी लाल जाट ने कहा कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य राज्यों के साथ मिलकर आगामी रबी सीजन के लिए ऐसी कार्ययोजना तैयार करना है, जिससे स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप किसानों को समय पर बीज, फसल और उर्वरक संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के…

नई दिल्ली, 29 सितंबर (आईएएनएस)। रबी सीजन की तैयारियों को लेकर आयोजित कृषि सम्मेलन में आत्मनिर्भरता को प्रमुख एजेंडा बनाया गया। सम्मेलन में तिलहन, दलहन और उर्वरक के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के साथ टिकाऊ कृषि, डिजिटल कृषि और जलवायु अनुकूल खेती पर विस्तार से चर्चा हुई। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक मांगी लाल जाट ने कहा कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य राज्यों के साथ मिलकर आगामी रबी सीजन के लिए ऐसी कार्ययोजना तैयार करना है, जिससे स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप किसानों को समय पर बीज, फसल और उर्वरक संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक मांगी लाल जाट ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि दो दिनों तक चले सम्मेलन में सभी राज्यों के अधिकारियों और मंत्रियों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि राज्यों की भौगोलिक और कृषि संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह मंथन किया गया कि किस क्षेत्र में कौन सी फसल और कौन सी किस्म किसानों के लिए उपयुक्त होगी। साथ ही यह सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया कि कोई किसान सरकारी योजनाओं और कृषि संबंधी सुविधाओं से वंचित न रहे।

उन्होंने कहा कि किसानों की प्रमुख चिंताओं में उर्वरकों की उपलब्धता भी शामिल है। इसके लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ उनके संतुलित उपयोग पर भी जोर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर उर्वरक उपयोग के लिए सिफारिशों को संशोधित किया गया है। किसानों को इन सिफारिशों के आधार पर ही उर्वरकों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे किसानों की लागत कम करने, मिट्टी की सेहत बनाए रखने और देश के संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिलेगी।

मांगी लाल जाट ने कहा कि पश्चिम एशिया में हालिया संकट के कारण उर्वरक सब्सिडी का बोझ सरकार पर बढ़ा है। ऐसे में उर्वरकों के विवेकपूर्ण इस्तेमाल की आवश्यकता और बढ़ जाती है। उर्वरक का अनावश्यक इस्तेमाल कम होने से सरकार के खर्च में कमी आएगी, मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर होगा और किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ेगा।

सम्मेलन में तिलहन और दलहन के उत्पादन को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। राज्यों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार कर उसके तत्काल क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ने को कहा गया है।

पंजाब के प्रतिनिधि ने कहा कि राज्य कृषि उत्पादन में देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से किसानों की जरूरतों, विशेषकर डीएपी जैसे उर्वरकों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए समय पर आवश्यक धनराशि जारी करने की मांग की।

–आईएएनएस

एसएके/डीकेपी

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IANS Agency

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