उत्तरकाशी की आराध्य हैं मां कुटेटी देवी, मनोकामना पूरी होने पर भक्त चढ़ाते हैं घंटी

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उत्तराखंड, 30 सितंबर (आईएएनएस)। देवभूमि उत्तराखंड के हर कोने में कोई न कोई सिद्धपीठ छिपा है, जहां भक्तों की अटूट आस्था बसती है। उत्तरकाशी जिले में स्थित मां कुटेटी देवी मंदिर एक प्रसिद्ध और पौराणिक सिद्धपीठ है, जहां मनोकामना पूरी होने पर भक्त घंटी चढ़ाते हैं। ऐसा माना जाता है कि मां कुटेटी देवी राजस्थान के कोटा-बूंदी राजघराने की कुलदेवी थीं। माता आदिशक्ति को समर्पित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 50 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए सभी से मंदिर के शांत वातावरण का आनंद…

उत्तराखंड, 30 सितंबर (आईएएनएस)। देवभूमि उत्तराखंड के हर कोने में कोई न कोई सिद्धपीठ छिपा है, जहां भक्तों की अटूट आस्था बसती है। उत्तरकाशी जिले में स्थित मां कुटेटी देवी मंदिर एक प्रसिद्ध और पौराणिक सिद्धपीठ है, जहां मनोकामना पूरी होने पर भक्त घंटी चढ़ाते हैं।

ऐसा माना जाता है कि मां कुटेटी देवी राजस्थान के कोटा-बूंदी राजघराने की कुलदेवी थीं। माता आदिशक्ति को समर्पित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 50 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए सभी से मंदिर के शांत वातावरण का आनंद लेने के लिए कहा।

उन्होंने मंदिर का वीडियो पोस्ट कर लिखा, “उत्तरकाशी की खूबसूरत घाटियों के बीच बसा ‘मां कुटेटी देवी मंदिर’ आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक शांति का एक शानदार संगम है। मां आदि शक्ति को समर्पित यह पवित्र मंदिर अपनी प्राचीन धार्मिक मान्यताओं, दिव्य माहौल और प्राकृतिक सुंदरता के लिए खास पहचान रखता है। उत्तरकाशी जिले में आने पर, इस पवित्र मंदिर के दर्शन जरूर करें।” मंदिर में विराजमान माता राजेश्वरी को लेकर मान्यता है कि माता रानी राजस्थान के कोटा से यहां आई हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार, कोटा के महाराजा गंगा यात्रा के दौरान उत्तरकाशी आए थे और उनका बैग खो गया था। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रार्थना की कि बैग मिलने पर वे अपनी पुत्री का विवाह यहीं के किसी योग्य युवक से कर देंगे। बैग मिलने पर राजकुमारी का विवाह हुआ लेकिन कुलदेवी से दूर होने के कारण वह दुखी थीं। तब देवी ने स्वप्न में आकर खेतों में तीन सुगंधित पत्थरों के रूप में प्रकट होने का आशीर्वाद दिया और उसी स्थान पर इस मंदिर की स्थापना हुई थी।

ऐसी मान्यता है कि इस पावन सिद्धपीठ में दर्शन और पूजा-अर्चना करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और विशेष रूप से संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होती है। नवरात्रि, अष्टमी और नवमी के दौरान यहां देश-विदेश से भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

–आईएएनएस

एनएस/पीएम

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IANS Agency

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