केरल में भाजपा ने संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ कुछ संगठनों द्वारा बुलाई गई राज्यव्यापी हड़ताल की सोमवार को यह कहते हुए कड़ी आलोचना की कि यह “अनावश्यक” और “राष्ट्रीय हित” के खिलाफ है। इन संगठनों ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ 17 दिसंबर को हड़ताल बुलाई है।
भगवा पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुम्मनम राजशेखरन ने आरोप लगाया कि यह हड़ताल सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) और विपक्षी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के समर्थन से कुछ “चरमपंथी समूह” की तरफ से बुलाई जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम के जरिए माकपा और कांग्रेस की आतंकी संगठनों के साथ की जा रही साजिश सामने आ गई है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि ये दल लोगों के बीच सांप्रदायिक भेदभाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। राजशेखरन ने यहां एक बयान में कहा, “17 दिसंबर को बुलाई गई हड़ताल अनावश्यक है और इसका लक्ष्य सांप्रदायिक एवं राजनीतिक लाभ लेना तथा राष्ट्र के हित के खिलाफ है।”
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उन्होंने दावा किया कि केंद्र में भाजपा नीत राजग की मौजूदा सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्रियों -जवाहरलाल नेहरू और मनमोहन सिंह द्वारा नागरिकता को लेकर अपनाए गए रुख और नीति का महज पालन किया है। राजशेखरन ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने नागरिकता पंजी के संबंध में दिए गए उच्चतम न्यायालय के आदेश को लागू भर किया है। संशोधित नागरिकता कानून को लागू किए जाने का विरोध कर रहे करीब 30 संगठनों की एक संयुक्त कार्य समिति ने 17 दिसंबर को केरल में राज्यव्यापी हड़ताल बुलाई है।


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