देहरादून : मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा है कि उत्तराखंड जैव विविधता, पर्यावरण व वन्य जीव संरक्षण के लिए संकल्पबद्ध है। ऑल इंडिया टाईगर एस्टीमेशन 2018 की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2010 में उत्तराखंड में 227 बाघ थे जो कि वर्ष 2014 में 340 व वर्ष 2018 में बढ़कर 442 हो गए हैं। वर्ष 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग डिक्लेरेशन में वर्ष 2022 तक बाघों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य रखा गया था। परंतु भारत ने यह लक्ष्य चार साल पहले ही हासिल कर लिया।
इसमें उत्तराखंड का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन व वन्य जीवन का संरक्षण उत्तराखंड की संस्कृति में है। बाघ फूड चैन में सबसे ऊपर हैं। बाघ पारिस्थितिक तंत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। कहा भी गया है कि वन हैं तो बाघ हैं और बाघ हैं तो वन हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी राज्यों के सम्मेलन में सभी प्रतिभागी राज्यों के प्रतिनिधियों ने विकास व पर्यावरण संरक्षण में संतुलन रखते हुए सतत् विकास का संकल्प लिया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम सतत विकास के लिए प्रयत्नशील है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कल मसूरी में हिमालयी राज्यों के सम्मेलन में भी सभी प्रतिभागी राज्यों के प्रतिनिधियों ने विकास व पर्यावरण संरक्षण में संतुलन रखते हुए सतत विकास का संकल्प लिया है और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हम सतत विकास के लिए प्रयत्नशील हैं।


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