बंबई उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि महाराष्ट्र सरकार की ओर से गठित एक उच्च स्तरीय समिति राज्य में रेजिडेंट डॉक्टरों की समस्याओं का समाधान करेगी। अक्टूबर 2017 में एक सरकारी प्रस्ताव पेश किया गया था जिसमें महाराष्ट्र में डॉक्टरों को आने वाली समस्याओं का समाधान निकालने के लिए 13 सदस्यों की समिति गठित करने की बात कही गई थी।
मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंदराजोग और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की पीठ ने कहा कि अगर भविष्य में रेजिडेंट डॉक्टरों की कोई मांग हो या समस्याएं हों, वे चिकित्सा स्वास्थ्य एवं शोध निदेशक को नोटिस देंगे जो समिति के सचिव सदस्य हैं। अदालत ने निर्देश दिया, “सदस्य सचिव को ऐसा कोई नोटिस प्राप्त होने के दो दिन के भीतर एक बैठक बुलानी होगी और समिति के सभी 13 सदस्यों को इसमें शामिल होना होगा।”
पीठ सामाजिक कार्यकर्ता अफक मंडाविया की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें इससे पहले रेजिडेंट डॉक्टरों के महाराष्ट्र एसोसिएशन के सदस्यों को इस साल सात अगस्त को हड़ताल करने से रोकने के संबंध में निर्देश देने को कहा था। अदालत ने गौर किया कि हड़ताल हुई नहीं हालांकि भविष्य में डॉक्टरों और सरकार को संवाद कायम रखना होगा।


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