मध्य प्रदेश की पूर्ववर्ती शिवराज सिंह चौहान सरकार के दौरान कथित तौर पर हुए ई-टेंडरिंग घोटाले में बुधवार को प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद आर्थिक अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने गुरुवार को सॉफ्टवेयर कंपनी अस्मो के कार्यालय पर छापा मारा, और कंपनी के तीन अधिकारियों का हिरासत में ले लिया। इस मामले में पूर्ववर्ती सरकार के कुछ प्रभावशाली नेताओं के नाम भी सामने आने की आशंका जताई जा रही है। पूर्ववर्ती सरकार के दौरान के मामले में कंप्यूटर इमर्जेसी रेस्पॉन्स टीम (सीईआरटी) की रपट से गड़बड़ी की बात सामने आई थी, जिसके बाद बुधवार को ईओडब्ल्यू ने प्राथमिकी दर्ज की। सीईआरटी की रपट के अनुसार, ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल में अंतिम तारीख निकल जाने के बाद टेंडर में छेड़छाड़ कर संबंधित निर्माण कंपनी को फायदा पहुंचाया गया। प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद बुधवार शाम से ही ईओडब्ल्यू की सक्रियता बढ़ी हुई है।
गुरुवार को ईओडब्ल्यू के दल ने मानसरोवर स्थित ओस्मो फाउंडेशन के दफ्तर पर दबिश दी। इस कंपनी के कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ किए जाने के साथ ही उपलब्ध दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। ईओडब्ल्यू सूत्रों के अनुसार, कंपनी के तीन अधिकारियों -वरुण चतुर्वेदी, विनय चौधरी और सुमित गोलवलकर- को हिरासत में लिया गया है। इन तीनों अधिकारियों से पूछताछ जारी है। वहीं कंपनी के कार्यालय में कागजात को खंगाला जा रहा है और कंप्यूटर की हार्ड डिस्क आदि को भी परखा जा रहा है।
ज्ञात हो कि मध्य प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रनिक डेवलपमेंट कर्पोरेशन लिमिटेड (एमपीएईडीसी) के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के संचालन का काम सॉफ्टवेयर कंपनियों के पास था। विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में ई-टेंडरिंग घोटाले ने तूल पकड़ा था। तब यह बात सामने आई थी कि सॉफ्टवेयर कंपनियों के सहारे टेंडर हासिल करने वाली निर्माण कंपनियों ने मनमाफिक दरें भरकर अनधिकृत रूप से दोबारा निविदा जमा कर दी। इससे टेंडर चाहने वाली कंपनी को मिल गया।
पूर्ववर्ती शिवराज सिंह चौहान सरकार के दौरान ई-टेंडरिंग में लगभग 3,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के घोटाले की आंशका जताई गई है और कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान अपने वचन-पत्र में ई-टेंडरिंग घोटाले की जांच कराने और दोषियों को सजा दिलाने का वादा किया था। इस मामले की जांच ईओडब्ल्यू के पास थी। ईओडब्ल्यू ने इसमें सीईआरटी की मदद ली।
सीईआरटी ने अपनी रपट में यह बात मानी है कि ई-टेंडरिंग में छेड़छाड़ हुई है। इसी रपट के आधार पर ईओडब्ल्यू ने पांच विभागों, सात कंपनियों और अज्ञात अधिकारियों व राजनेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है। ईओडब्ल्यू का मानना है कि लगभग 3,000 करोड़ रुपये के ई-टेंडरिंग घोटाले में साक्ष्य और तकनीकी जांच में पाया गया है कि ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल में छेड़छाड़ कर जल निगम के तीन, लोक निर्माण विभाग के दो, जल संसाधन विभाग के दो, मप्र सड़क विकास निगम के एक और लोक निर्माण की पीआईयू के एक, यानी कुल मिलाकर नौ टेंडर में सॉफ्टवेयर के जरिए छेड़छाड़ की गई। इसके जरिए सात कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया है।


Download Android App
Download iOS App



