कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का प्रकोप अब थोड़ा कम हो गया है, लेकिन गोवा इस दूसरी लहर से निपटने में थोड़ा ढीला साबित हुआ, जिस कारण उसे खूब आलोचना सहनी पड़ी। अब मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की सरकार ने तीसरी लहर से निपटने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है, जिसकी चपेट में बच्चों के अधिक आने की उम्मीदें लगाई जा रही हैं।
दूसरी लहर के चरम पर होने के दौरान गोवा के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान गोवा मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के चलते लगभग 100 बच्चों की मौत हो गई थी। इस त्रासदी ने स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे पर सवालिया निशान लगा दिया था। तीसरी लहर से निपटने की तैयारी में सावंत ने नए स्थापित विशेष कार्य बल के अध्यक्ष के रूप में स्वास्थ्य प्रशासन की बागडोर अपने हाथों में ले ली है।
इसकी स्थापना आसन्न संकट से निपटने के लिए किया गया है। इस फोर्स के द्वारा राज्य में 120 से अधिक बाल रोग विशेषज्ञों को ट्रैक करने का काम शुरू कर दिया गया है, जिन्हें अगले सप्ताह से वेंटिलेटर प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण कौशल प्रदान किए जाएंगे। सावंत के अनुसार, नर्सों को भी तीसरी लहर के दौरान बच्चों से संबंधित कोविड आपात स्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
उन्होंने कहा, गोवा में लगभग 120 बाल रोग विशेषज्ञ हैं। वरिष्ठतम बाल रोग विशेषज्ञों के अलावा, हम इनमें से बाकियों को वेंटिलेटर ऑपरेशन में प्रशिक्षित करेंगे। नर्सों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। डॉक्टरों और नर्सों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम 7 जून से शुरू होने की उम्मीद है।
ऑक्सीजन में कमी, प्रशिक्षित जनशक्ति की कमी और साथ ही मौजूदा स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में कमियों के चलते दूसरी लहर के दौरान राज्य सरकार की आलोचना हुई थी। इस दौरान राज्य में प्रतिदिन के हिसाब से लगभग 3,000 नए मामले सामने आ रहे थे। हालांकि अब ऐसा लगता है कि सावंत के नेतृत्व वाले प्रशासन ने इससे सबक लिया है और दूसरी लहर के दौरान पैदा हुई खामियों को दूर करने की प्रक्रिया में है।


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