Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज स्वास्थ्य विभाग की बैठक में प्रदेश की पहली पोशन नीति बनाने की योजना की जानकारी दी। उनका कहना है कि यह नीति पूरे प्रदेश के लोगों को समग्र स्वास्थ्य और पोषण लाभ प्रदान करने में मदद करेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य पहले से ही कई पोषण और खाद्य सुरक्षा योजनाएं चला रहा है, जैसे एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS), मिड-डे मील योजना, और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS)।
Himachal Pradesh News: न्यूट्रिशनल प्रोफाइलिंग का महत्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं के प्रभाव को सही तरीके से समझने और लागू करने के लिए न्यूट्रिशनल प्रोफाइलिंग बहुत जरूरी है। इससे लोगों को यह जानकारी मिलेगी कि उनके भोजन में कौन-कौन से पोषक तत्व, कैलोरी और फोर्टिफिकेशन मौजूद हैं। यह जागरूकता लोगों को संतुलित आहार अपनाने और स्वास्थ्य सुधारने में मदद करेगी। साथ ही, नीति को अंतिम रूप देने से पहले राज्य में पोशन और फूड टेस्टिंग सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है।

CM Sukhu News: नई प्रयोगशालाओं की स्थापना
मुख्यमंत्री ने बताया कि कंडाघाट स्थित कंपोजिट टेस्टिंग लैब को अपग्रेड किया जाएगा। इसके अलावा नए प्रयोगशालाओं की स्थापना भी की जाएगी। पहला चरण कांगड़ा जिले में नई लैब स्थापित करने का होगा, और आने वाले वर्षों में अन्य जिलों में भी क्षेत्रीय टेस्टिंग लैब बनेंगी। राज्य मंत्रिमंडल ने हाल ही में कांगड़ा, मंडी, शिमला और सोलन जिले के बद्दी क्षेत्र में नई प्रयोगशालाओं के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इससे प्रदेश में खाद्य और पोषण संबंधित जांच सुविधाएं और मजबूत होंगी।
बजट और संसाधनों की व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने बताया कि कंडाघाट लैब के विकास के लिए 8.50 करोड़ रुपये और कांगड़ा में फूड टेस्टिंग लैब स्थापित करने के लिए 25 करोड़ रुपये जारी किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इन प्रयोगशालाओं के सुचारू संचालन के लिए पर्याप्त स्टाफ और तकनीकी संसाधनों की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा, यह कदम राज्य की सभी पोषण योजनाओं की गुणवत्ता और प्रभावकारिता बढ़ाने में मदद करेगा। नई लैब के माध्यम से खाद्य सुरक्षा, पोषण मानक और लोगों की स्वास्थ्य स्थिति पर बेहतर निगरानी की जा सकेगी।
समग्र लाभ
मुख्यमंत्री सुक्खू ने जोर देते हुए कहा कि यह पहल राज्य के सभी नागरिकों, विशेष रूप से बच्चों, महिलाओं और कमजोर वर्गों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पोषण नीति और टेस्टिंग लैब की मदद से न केवल लोगों को बेहतर और सुरक्षित भोजन मिलेगा, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ी जागरूकता भी बढ़ेगी।
इस नीति और प्रयोगशालाओं की शुरुआत से प्रदेश में खाद्य गुणवत्ता, पोषण स्तर और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार आने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी योजनाओं और लैब का संचालन पारदर्शी और प्रभावी तरीके से किया जाए। यह पहल हिमाचल प्रदेश को स्वस्थ और पोषित समाज की दिशा में एक बड़ा कदम बनाने वाली है।
रिपोर्ट: विक्रांत सूद


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