यूसीसी के तहत देश में सभी नागरिकों के लिए एक कानून लाया जाना है लेकिन जब इसका विरोध होता है तो बात घूम-फिरकर मुसलमानों के इर्द गिर्द की सिमट जाती है।ऐसे में ये जानना जरूरी है कि इस मामले पर मुसलमान क्या सोचते हैं। यही जानने के लिए मुसलमानों की राय ली गई। हरियाणा का नूह मुस्लिम बहुल आबादी वाला क्षेत्र है। यहां करीब 85 फीसदी मुसलमान रहते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक गांधी ग्राम खासखेड़ा गांव में शुरुआती सवालों में लोग झिझकते रहे और कुछ भी बोलने से बचते नजर आए। लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाने पर जब सवाल हुआ तो कुछ लोगों ने बोलने से मन किया तो वहीँ कुछ लोगों ने अपनी राय रखी ।
शरियत के नाम पर यूसीसी को मानने से इनकार
आखिरकार जब बोलने को तैयार हुए तो शरियत के नाम पर यूसीसी को मानने से इनकार कर दिया। कहा कि एक इंसानी कानून है और एक इस्लामी कानून है। इंसानी कानून से हम प्यार करते हैं, लेकिन इसे इंसानों ने बनाया है। जो इस्लामी कानून है, वो आसमान से बनकर आया है और उसमें एक जर्रे का भी फर्क हम बर्दाश्त नहीं करेंगे यूसीसी रद्द करने की मांग करते हुए मुसलमानों ने कहा कि बगीचे की खूबसूरती अलग-अलग फूलों से है। अगर एक ही तरह से फूल लगा दिए जाएं तो खूबसूरती नहीं रहेगी।

महिलाओं को तलाक के अधिकार पर ये बोले मुसलमान
अभी यूसीसा का कोई ड्राफ्ट तो नहीं आया है लेकिन सैद्धांतिक तौर पर चर्चा है कि इसमें महिलाओं को भी तलाक का बराबर अधिकार होगा। इस बात से नूह के मुसलमानों की राय अलग है। मुसलमानों ने एक रिपोर्ट के मुताबिक कहा कि अगर तलाक का अधिकार औरतों के हाथ में जाएगा तो इसका गलत इस्तेमाल होगा।


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