देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड का मुद्दा काफी गरमाया हुआ है।इसे लेकर राजनीतिक दलों में अलग अलग राय है। भाजपा के नेता देश में समान नागरिक संहिता की जरूरत बता रहे हैं तो विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं। तो वहीं, छत्तीसगढ़ में भी इस मसले पर सियासत जारी है।अब सूबे में आदिवासी समूहों की छत्र संस्था छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज (सीएसएएस) ने केंद्र सरकार को इसे लागू करने में जल्दबाजी नहीं करने की सलाह दी है।
ऐसा कानून राज्य के लिए खतरा होगा- सीएसएएस
आपको बता दें छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज (सीएसएएस) का कहना है कि ऐसा कानून राज्य के लिए खतरा होगा। यह उन जनजातियों का अस्तित्व के लिए जोखिम पैदा करेगा जिनके पास अपने समाज पर शासन करने के लिए स्वयं के पारंपरिक नियम कानून हैं। सीएसएएस के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने कहा कि उनका संगठन सामान्य नागरिक कानून का पूरी तरह विरोध नहीं करता लेकिन केंद्र को इसे लाने से पहले सभी को विश्वास में लेना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी समाज में यूसीसी लागू करना अव्यावहारिक लगता है।
कानूनों में महिलाओं को पैतृक भूमि पर अधिकार नहीं दिया
इसके साथ ही उन्होंने आगे कहा, कि भारत के विधि आयोग ने देश में यूसीसी के लिए सुझाव आमंत्रित किए हैं। छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदायों ने अपने पारंपरिक नियमों को ध्यान में रखते हुए अपनी राय प्रस्तुत की है। आदिवासी समुदाय जन्म, तलाक, विभाजन, उत्तराधिकार, विरासत, भूमि और संपत्ति के मामलों में अपने पारंपरिक कानूनों द्वारा शासित होता है और यही इसकी पहचान है। आदिवासी समाज में महिलाओं को मौजूदा पति को छोड़ने के बाद कई बार शादी करने की आजादी है। पारंपरिक कानूनों में महिलाओं को पैतृक भूमि पर अधिकार नहीं दिया गया है।


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