भारतीय हॉकी टीम में एक बड़ा विवाद सामने आया है। क्योंकि एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय टीम के चार एक्सपीरिएंस्ड खिलाड़ियों के इंटरनेशनल करियर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हॉकी इंडिया इन खिलाड़ियों को टीम से बाहर करने की तैयारी में है और वो एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान अपना आखिरी इंटरनेशनल मुकाबला खेल सकते हैं। वहीं हैरानी की बात यह है कि रिलेटेड खिलाड़ियों को इस फैसले की जानकारी मीडिया के जरिए मिली है। इससे खिलाड़ी नाराज हैं और उन्होंने सवाल उठाया है कि इतने बड़े फैसले से पहले उनसे बातचीत क्यों नहीं की गई।
Hockey India Controversy: इन चार खिलाड़ियों के संन्यास को लेकर चर्चा

एक मीडिया हाउस की रिपोर्ट के मुताबिक, हॉकी इंडिया से जुड़े सूत्रों ने बताया कि मनदीप सिंह, जरमनप्रीत सिंह, अमित रोहिदास और नीलाकांता शर्मा 27 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच पंजाब में होने वाली एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में भारत के लिए अपना आखिरी मैच खेल सकते हैं। इस खबर के सामने आने के बाद खिलाड़ियों के बीच नाराजगी की बात सामने आई है। एक खिलाड़ी ने बताया कि उन्हें इस बारे में मीडिया से पता चला, जबकि इस तरह की जरूरी अनाउंसमेंट से पहले कम से कम उनसे बात की जानी चाहिए थी। वहीं कुछ खिलाड़ियों का मानना है कि देश के लिए मेडल जीतने के बाद उन्हें सम्मान के साथ अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए।
एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने के बाद तैयारी कर रहे थे खिलाड़ी

रिपोर्ट के मुताबिक, इन खिलाड़ियों को उम्मीद थी कि एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद वे आने वाले इंटरनेशनल टूर्नामेंटों और ओलंपिक की तैयारी जारी रखेंगे। ऐसे में संन्यास से जुड़ी खबरों ने उन्हें हैरान कर दिया। एक खिलाड़ी ने बताया कि वह अपने भविष्य को लेकर सामान्य रूप से प्लानिंग बना रहा था, तभी अचानक उसके पास फोन आने लगे। लोग उससे पूछने लगे कि क्या उसने अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास लेने का फैसला कर लिया है। खिलाड़ी के मुताबिक, उसने ऐसा कोई ऐलान नहीं किया था और लॉस एंजिलिस ओलंपिक की तैयारी को लेकर चर्चा भी हुई थी।
इस इवेंट ने खिलाड़ियों को इमोशनल रूप से भी प्रभावित किया है। उनका कहना है कि अगर प्रदर्शन में कमी होती, तो वे फैसले को समझ सकते थे, लेकिन उन्हें अपने भविष्य को लेकर साफ जानकारी तक नहीं मिली।
‘मैं अपने माता-पिता को क्या जवाब दूं?’

एक खिलाड़ी ने अपनी निराशा जाहिर करते हुए कहा कि अचानक इस तरह की खबर सामने आने से वह परेशान हो गया। उसके माता-पिता भी उसके बदले हुए व्यवहार को लेकर सवाल पूछ रहे थे, लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह उन्हें क्या बताए। खिलाड़ियों का कहना है कि करियर का अंत हर खिलाड़ी के जीवन का हिस्सा है, लेकिन विदाई का तरीका भी मायने रखता है।
देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने और पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को उम्मीद रहती है कि उनके करियर से जुड़ा कोई भी बड़ा फैसला सम्मानजनक तरीके से लिया जाएगा। एक खिलाड़ी ने यह भी कहा कि अगर उसे टीम में नहीं चुना जाता, तो वह इसे चयन प्रक्रिया का हिस्सा मान सकता है। लेकिन संन्यास की घोषणा उससे पूछे बिना किए जाने की खबर से उसे दुख पहुंचा है।
2028 ओलंपिक से पहले टीम में बदलाव की चर्चा

भारतीय मेन्स हॉकी टीम में 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक से पहले बदलाव की अटकलें पहले से लगाई जा रही थीं। माना जा रहा है कि टीम प्रबंधन नए खिलाड़ियों को अवसर देने के लिए वरिष्ठ खिलाड़ियों की भूमिका पर पुनर्विचार कर सकता है। हालांकि, इस मामले में कई सवाल उठ रहे हैं। चार खिलाड़ियों के नाम सामने आने के पीछे क्या आधार है? क्या उनके हालिया प्रदर्शन को इसका कारण माना गया है? और इस फैसले के लिए कौन-से मानदंड अपनाए गए हैं?
इन सवालों पर अभी साफ जानकारी सामने नहीं आई है। खिलाड़ियों की नाराजगी की एक वजह यह भी बताई जा रही है कि टीम में अन्य अनुभवी खिलाड़ी भी हैं, जिनके प्रदर्शन को लेकर अलग-अलग राय हो सकती है। ऐसे में चयन प्रक्रिया और फैसले के आधार पर पारदर्शिता की मांग उठ रही है।
खिलाड़ियों ने सम्मानजनक विदाई की उठाई मांग

खिलाड़ियों का मानना है कि टीम में चयन करना चयनकर्ताओं का अधिकार है, लेकिन लंबे समय तक देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को उनके भविष्य से जुड़े फैसलों के बारे में सम्मानपूर्वक जानकारी दी जानी चाहिए। एक खिलाड़ी ने कहा कि वह खुद भी ओलंपिक से पहले अंतरराष्ट्रीय हॉकी से विदाई लेने के बारे में सोच रहा था, लेकिन उसे उम्मीद नहीं थी कि इस तरह उसकी जानकारी के बिना संन्यास की खबर सामने आएगी।
फिलहाल इस मामले में हॉकी इंडिया की ओर से फैसले के आधार और खिलाड़ियों से बातचीत को लेकर सिचुएशन साफ होना बाकी है। अब देखना होगा कि इस विवाद पर ऑफिशियल तौर पर क्या रिएक्शन आता है और इन चार खिलाड़ियों के इंटरनेशनल करियर को लेकर आगे क्या फैसला लिया जाता है।
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