चुनाव से ऐन पहले उनका यह फैसला सियासी समीकरणों को प्रभावित करने वाला माना जा रहा है। यहां तक कि इसे राज्य में बड़े सियासत घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि राज्य में माना जा रहा है कि भाजपा वैक्यूम के तौर पर काम कर रही है जो टीएमसी के विरोध के नेताओं को अपनी तरफ खींच रही है मगर यहां उलट होता दिखाई दे रहा है।
भवानीपुर पर नजर
भवानीपुर विधानसभा सीट इस बार भी हाई-प्रोफाइल बनी हुई है। यहां ममता बनर्जी चुनाव मैदान में हैं, जबकि बीजेपी ने उनके मुकाबले सुबेन्दु अधिकारी को उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में इस सीट पर कड़ी टक्कर की संभावना जताई जा रही है।
वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले चंद्र बोस को अपने साथ जोड़कर टीएमसी ने बीजेपी पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश की है। यह दबाव हाल में लिएंडर पेस के टीएमसी छोड़ भाजपा में शामिल होने से ज्यादा माना जा रहा है क्योंकि चंद्र बॉस राजनीतिक विरासत के साथ आते हैं।
#WATCH | Kolkata, West Bengal | Netaji Subhas Chandra Bose’s grandnephew Chandra Kumar Bose joins TMC. pic.twitter.com/z8Rzt46XHo
— ANI (@ANI) April 12, 2026
बीजेपी पर तीखा हमला
टीएमसी में शामिल होने के बाद चंद्र बोस ने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बीजेपी में शामिल होना उनका गलत फैसला था, जिसे उन्होंने अब सुधार लिया है। उनके मुताबिक, पार्टी न तो नेताजी के सिद्धांतों पर चलती है और न ही संविधान की भावना के अनुरूप काम करती है।
उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी में रहते हुए वह नेताजी की विचारधारा के अनुसार काम नहीं कर पाए, क्योंकि पार्टी का माहौल इसकी अनुमति नहीं देता।
चंद्र बोस ने आगे कहा कि बंगाल की संस्कृति और इतिहास के साथ बीजेपी की सोच मेल नहीं खाती। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि भारत की पहचान सर्वधर्म समभाव से रही है। उनके अनुसार, वर्तमान समय में देश एक चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है और ऐसे में सभी को एकजुट होकर हालात को सुधारने की जरूरत है।
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