‘UGC के नए नियमों का नहीं होने देंगे दुरुपयोग’…बढ़ते प्रदर्शन के बीच धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा ऐलान

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Dharmendra Pradhan On UGC rules: नई दिल्ली, 27 जनवरी (आईएएनएस) यूजीसी के नए नियमों को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया है कि इन प्रावधानों का दुरुपयोग नहीं होगा। किसी के साथ भेदभाव या अत्याचार के लिए इन प्रावधानों का दुरुपयोग नहीं करने दिया जाएगा। इसके साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने यूजीसी, केंद्र सरकार व राज्य सरकारों के तय दायित्व की भी बात कही।केंद्रीय शिक्षा मंत्री का कहना है कि वह सभी को आश्वस्त करते हैं कि किसी से भी भेदभाव नहीं होगा और कोई भी इस कानून का दुरुपयोग नहीं…

Dharmendra Pradhan On UGC rules: नई दिल्ली, 27 जनवरी (आईएएनएस) यूजीसी के नए नियमों को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया है कि इन प्रावधानों का दुरुपयोग नहीं होगा। किसी के साथ भेदभाव या अत्याचार के लिए इन प्रावधानों का दुरुपयोग नहीं करने दिया जाएगा। इसके साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने यूजीसी, केंद्र सरकार व राज्य सरकारों के तय दायित्व की भी बात कही।केंद्रीय शिक्षा मंत्री का कहना है कि वह सभी को आश्वस्त करते हैं कि किसी से भी भेदभाव नहीं होगा और कोई भी इस कानून का दुरुपयोग नहीं कर सकेगा। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में आई है।

यूजीसी के नए नियमों को लेकर कई नेताओं व संगठनों ने संशय व्यक्त किया है। इस संशय पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि वह सभी को आश्वस्त करते हैं कि किसी से भी भेदभाव नहीं होगा और कोई भी इस कानून का दुरुपयोग नहीं कर सकेगा। उन्होंने दोहराया कि सरकार का उद्देश्य उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, न्यायसंगत और जवाबदेह बनाना है।

वहीं यूजीसी का मानना है कि नए नियमों का मकसद शिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता बढ़ाना और सभी हितधारकों के अधिकारों की रक्षा करना है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि किसी वर्ग, समुदाय या व्यक्ति के साथ अन्याय न हो।

यूजीसी के अधिकारियों का कहना है कि नियमों के लागू होने से किसी का उत्पीड़न नहीं होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छात्रों, शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों के हित सर्वोपरि रहेंगे और सभी आशंकाओं को दूर करने के लिए संवाद का रास्ता खुला रहेगा।

वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से यूजीसी के इन नियमों को लेकर प्रश्न पूछे गए। मंगलवार को उनसे पूछा गया कि यह पूरा मामला क्या है। क्या लोग इस मामले को समझ ही नहीं पा रहे हैं या फिर जानबूझकर विवाद बनाया जा रहा है। इस पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि वह पूरी विनम्रता के साथ सभी को आश्वस्त करना चाहते हैं कि किसी का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि भेदभाव के नाम पर किसी को भी इसका अनुचित इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं रहेगा। इसमें यूजीसी हो, भारत सरकार हो या राज्य सरकार हो, इसमें उनका दायित्व रहेगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि वह आश्वस्त करते हैं कि जो व्यवस्था हुई है, भारत की जो भी व्यवस्था हो, वह संविधान की परिधि के अंदर होगी।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह जो विषय आया है, यह तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में व्यवस्था है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने यह भी दोहराया कि किसी पर भी अत्याचार नहीं होगा।

दरअसल यूजीसी के नए नियमों का लगातार विरोध हो रहा है। इन नियमों को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया कि ये नियम सामान्य वर्ग के लिए भेदभावपूर्ण हैं। याचिकाकर्ता ने कहा है कि इन नियमों से सामान्य वर्ग के मौलिक अधिकारों का हनन होता है। इसका विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि इन नियमों में सामान्य वर्ग के छात्रों के उत्पीड़न या शिकायत को शामिल नहीं किया गया है। यानी केवल पिछड़े वर्गों के छात्रों की शिकायत पर ही कार्रवाई होगी। शिकायत गलत पाए जाने की स्थिति में शिकायतकर्ता के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी यह भी स्पष्ट नहीं है।

गौरतलब है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 13 जनवरी को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन 2026’ लागू किया। इसके तहत कई संस्थानों को इक्विटी कमेटी बनाने और भेदभाव विरोधी नीति लागू करने के निर्देश दिए गए। यूजीसी के नए नियमों का उद्देश्य कैंपस पर जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान, विकलांगता आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को पूरी तरह समाप्त करना है। इन नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षा संस्थानों (विश्वविद्यालयों और कॉलेजों) में इक्विटी कमेटी गठित करने का प्रावधान है।

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News Desk

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