Energy Infrastructure Attacks: मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब सिर्फ सैन्य टकराव नहीं रही, बल्कि सीधे ‘ऑयल वॉर’ यानी तेल युद्ध में बदल गई है। इजरायल ने ईरान के सबसे बड़े साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया, जिसके बाद ईरान ने कतर और यूएई की ऊर्जा सुविधाओं पर जवाबी हमले शुरू कर दिए। इसके कारण दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई और भारत जैसे देशों में ऊर्जा संकट बढ़ गया है।
मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध अब सिर्फ सैन्य टकराव नहीं, बल्कि बीते 24 घंटों में ये ‘ऑयल वॉर’ में बदल गया है। क्योंकि इस जंग में एनर्जी ठिकानों पर सीधे हमले हो रहे हैं, जिसका असर दुनिया के कई इलाकों में पड़ रहा है। तेल की ग्लोबल सप्लाई भी प्रभावित हुई है और तेल की कीमतों में उछाल आया है।
Energy Infrastructure Attacks: तेल युद्ध कैसे शुरू हुआ?

मिडल ईस्ट की जंग में बड़ा बदलाव तब आया, जब इज़रायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया। यह गैस फील्ड खाड़ी के नीचे मौजूद है और दुनिया का सबसे बड़ा गैस फील्ड है। यह ईरान और क़तर के बीच साझा किया गया है। ईरान इसे ‘साउथ पार्स’ और क़तर इसे ‘नॉर्थ फील्ड’ कहते हैं।
बुधवार को ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि इजराइल ने ईरान के ‘साउथ पार्स’ प्राकृतिक गैस क्षेत्र पर हमला किया है, जो दुनिया के सबसे बड़े गैस संसाधनों का हिस्सा है और देश की ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा ज़रिया भी।
खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा सुविधाओं पर हमले करेगा ईरान
सरकारी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को ईरान के खाड़ी तट पर ‘असालुयेह’ के पास मौजूद इस गैस क्षेत्र से जुड़ी सुविधाओं में आग लग गई थी। इसके जवाब में ईरान ने कसम खाई कि वह खाड़ी इलाके के अन्य देशों में स्थित ऊर्जा सुविधाओं पर जवाबी हमला करेगा।
ईरान जंग ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते होने वाले कच्चे तेल और लिक्विफ़ाइड प्राकृतिक गैस (LNG) के ज्यादातर निर्यात को रोककर वैश्विक अर्थव्यवस्था को ऊर्जा के क्षेत्र में एक ज़बरदस्त झटका दिया है। ईरान ने अपने खाड़ी पड़ोसी देशों की प्रमुख निर्यात सुविधाओं पर भी हमले किए हैं, जिससे ऊर्जा की कीमतों पर और ज्यादा दबाव पड़ा है। यह सब तब हो रहा है, जब खाड़ी क्षेत्र के देशों (सऊदी अरब, क़तर, ओमान, इराक़ और यूएई) ईरान पर हो रहे अमेरिका-इज़रायल के हमलों में शामिल नहीं हैं।
Energy Infrastructure Attacks: ईरान के मिसाइल हमले में क़तर की प्रमुख गैस सुविधा को नुकसान
सऊदी अरब, यूएई और क़तर को चेतावनी देने के कुछ घंटे बाद, तेहरान ने हमला किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के हमले में क़तर की एक बड़ी गैस सुविधा ‘रास लफ़ान’ में आग लग गई और उसे काफी नुकसान हुआ। इससे यह चिंता बढ़ी है कि यह युद्ध अब सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा संसाधनों को भी खतरा हो सकता है।
‘QatarEnergy’ ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि एक मिसाइल हमले में उनकी ‘रास लफ़ान’ गैस सुविधा को नुकसान हुआ, और आग बुझाने से पहले काफी नुकसान हुआ। ईरान के हमलों के कारण पहले ही वहां उत्पादन रोक दिया गया था। रास लफ़ान पर हुआ यह हमला मिडिल ईस्ट और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हलचल का कारण बना है, और यह ईरान-अमेरिका-इज़रायल के बीच जारी युद्ध में एक खतरनाक मोड़ है।
Energy Infrastructure Attacks: सऊदी तेल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ईरान का हमला
ईरान ने सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत में स्थित कई तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया। इसके साथ ही कुवैत, बहरीन और यूएई पर भी हमले किए गए। सऊदी अरब के विदेश मंत्री, प्रिंस फैसल बिन फरहान ने गुरुवार को ईरान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, “जो थोड़ा-बहुत भरोसा था, वह अब पूरी तरह टूट चुका है।” यह बयान खाड़ी देशों और अन्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद आया, जो ईरान के हमलों पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई थी।
प्रिंस फैसल ने कहा, “हमारे देश और हमारे पड़ोसी देशों पर हुए हमले पर हमारा पूरा ध्यान है। हम इन हमलों को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे, चाहे वह सियासी, आर्थिक, कूटनीतिक या कोई और तरीका हो।”
तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी
इजरायल के हमले के बाद, ईरान ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी, जिसके चलते तेल की कीमतों में उछाल आ गया। ब्रेंट क्रूड की कीमत 6% बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी तेल की कीमतें 5% बढ़कर 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। इसके कारण पेट्रोल और अन्य वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ गईं। युद्ध के बाद से ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 50% का इज़ाफ़ा हो चुका है।
India Oil Imports: भारत पर क्या पड़ेगा असर?

इस जंग से भारत पर सबसे ज्यादा असर हो रहा है क्योंकि क़तर भारत का सबसे बड़ा गैस सप्लायर है। भारत हर साल करीब 27 मिलियन टन एलएनजी आयात करता है, जिसमें से 47% यानी 12-13 मिलियन टन क़तर से आता है।
रास लफ़ान पर हमले और होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद होने से कई गैस टैंकर समंदर में फंसे हैं। भारत ईरान से संपर्क करके जहाज निकालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन बढ़ी हुई कीमतें और सप्लाई रुकने से पेट्रोल-डीजल, बिजली और उद्योगों पर दबाव बढ़ेगा।
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