Explainer : क्या है खतनाक हंता वायरस, कोरोना से है कितना अलग और घातक? जानिए पूरी डिटेल

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Hantavirus kya hai? : Genz जेनरेशन को कोरोना वायरस अच्छे से याद होगा, कैसे दुनिया का पहिया रुक गया था, लोग घरों में कैद थे और सबसे बुरी बात कि लाखों लोगों की मौत इस वायरस के चलते हो गई थी. इस सदमे से पूरी दुनिया आज भी उभरने में लगी है कि अब हंता वायरस का खौफ अब पूरी दुनिया में हावी होने लगा है. जिसकी मार कोरोना से खतरनाक बताई जा रही है. मगर सवाल यह कि क्या यह कोरोना जैसे तेजी से फैलता है? क्या इससे उतना ही घबराने की जरूरत है? इस मामले में WHO का…

Hantavirus kya hai? : Genz जेनरेशन को कोरोना वायरस अच्छे से याद होगा, कैसे दुनिया का पहिया रुक गया था, लोग घरों में कैद थे और सबसे बुरी बात कि लाखों लोगों की मौत इस वायरस के चलते हो गई थी. इस सदमे से पूरी दुनिया आज भी उभरने में लगी है कि अब हंता वायरस का खौफ अब पूरी दुनिया में हावी होने लगा है. जिसकी मार कोरोना से खतरनाक बताई जा रही है. मगर सवाल यह कि क्या यह कोरोना जैसे तेजी से फैलता है? क्या इससे उतना ही घबराने की जरूरत है? इस मामले में WHO का क्या कहना है? और सबसे बड़ी बात कि हंता वायरस आखिर है क्या?

क्या है हंता वायरस

बता दें, हंता वायरस का नाम दक्षिण कोरिया की एक नदी के नाम पर रखा गया है, यह किसी एक बीमारी को नहीं बल्कि वायरसों के एक पूरे परिवार को दर्शाते हैं. हंता वायरस की 20 अलग अलग प्रजातियां हैं. WHO का कहना है कि इनमें से लगभग सभी का सम्बन्ध रोडेंट्स यानी कुतरने वाले जानवर से होने वाले संक्रमण से है हो आमतौर पर चूहों और गिलहरियों के सूखे मलमूत्र से होता है.

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार इसका एक किस्म ‘एंडीज वायरस’ के नाम से जाना जाता है और माना जाता है कि यह इंसानों से इंसानों में फैलता है, हालांकि ऐसा बहुत कम होता है.

क्यों हुई हंता वायरस की चर्चा

दरअसल हाल फिलहाल हंता वायरस को लेकर चिंता उजागर तब हुई जब डच झंडे वाले एक लग्जरी क्रूज शिप MV Hondius में रहस्यमयी सांस संबंधी बीमारी के यानी हंता वायरस इंफेक्शन की पुष्टि हुई. इस जहाज से जुड़े 8 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 5 लोगों में हंता वायरस की पुष्टि हुई जबकि 3 मामले संदिग्ध माने जा रहे हैं. तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है.

WHO के अधिकारियों के मुताबिक जहाज पर पहला इंफेक्टेड व्यक्ति 6 अप्रैल को बीमार पड़ा था और 11 अप्रैल को उसकी मौत हो गई. शुरुआत में डॉक्टरों को हंता वायरस का शक नहीं हुआ क्योंकि उसके लक्षण सामान्य सांस संबंधी इंफेक्शन जैसे थे. इसी वजह से शुरुआती सैंपल भी नहीं लिए गए. बाद में जब दूसरे यात्री भी बीमार पड़ने लगे, तब स्वास्थ्य एजेंसियों ने हंता वायरस की जांच शुरू की.

वायरस फैलने का पैटर्न क्या है

एक बात तय है कि यह वायरस घातक है. जो इन्फेक्टेड होता है उसकी स्थिति गंभीर बनी रहती है. मगर सवाल यह कि क्या यह वायरस फैलता है? WHO के अनुसार आमतौर पर यह तब फैलता है, जब लोग चूहों या गिलहरी (यानी कुतरने वाले जानवर) के मल, मूत्र और लार के सीधे संपर्क में आते हैं. ऐसा माना जा रहा है कि यह वायरस अक्सर चूहों से फैलता है. इसमें सबसे अधिक जो मामले आए हैं वह चूहों के मल मूत्र से हवा में फैले कीटाणु सबसे खतरनाक बताए जा रहे हैं, इसके बाद सांस के माध्यम से कीटाणु शरीर में जाते हैं और इंसान हंता वायरस स एसंक्रमित हो सकते हैं.

यह दो गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है-

  • इन्टरनल ब्लीडिंग
  • किडनी फेल्योर

हालाँकि यह भी माना जा रहा है कि यह वायरस किसी चूहे या गिलहरी जैसे कुतरने वाले जानवर के काटने से भी फैल सकता है. विशेषज्ञों का मानना है हंता वायरस जिस तरह से फैलता है, वह फ़्लू से अलग है. फ़्लू खांसने या छींकने पर निकलने वाली छोटी-छोटी बूंदों (ड्रॉपलेट्स) के ज़रिए फैलता है. बीबीसी ने WHO की अधिकारी डॉक्टर मारिया वैनके हवाले से बताया, “हम एक-दूसरे से काफ़ी दूर रहते हुए होने वाले सामान्य संपर्क की बात नहीं कर रहे हैं.”

इन्फेक्ट होने पर क्या लक्षण सामने आ रहे हैं

माना जा रहा है कि यह वायरस दो गंभीर बीमारियाँ पैदा कर सकता है. पहली बीमारी, हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम – जिसमें थकान, बुक्खर और मांसपेशियों में दर्द शुरू होता है और बाद में सरदर्द, चक्कर आना, कंपकंपी व पेट की समस्याएँ होती हैं. इसके अलावा सांस से जुड़े लक्षण भी दिखाई देते हैं. यानी सांस लेने में तकलीफ और कठिनाई होने लगती है. यह लक्षण दिखने में 8 हफ़्तों तक का समय लग सकता है. इस वायरस में मृत्यु दर 20-40 प्रतिशत है.

दूसरी बीमारी, हेमोरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम (एचएफ़आरएस) है, जो शुरू में फ़्लू जैसी लगती है, आगे चलकर यह किडनी पर असर डाल सकती है और लो ब्लड प्रेशर, शरीर के अंदर रक्तस्राव (इंटरनल ब्लीडिंग) और किडनी के पूरी तरह फेल होने का वजह बन सकती है.

अलर्ट मोड में WHO

बता दें, हंता वायरस में इन्फेक्ट होने के 6-8 हफ्तों तक वायरस की इन्क्यूबेशन हो सकती है. यानी इसके लक्षण लम्बे समय बाद भी सामने आ सकते हैं. इस मामले में WHO तैयार हो चुका है. WHO ने उन 12 देशों को अलर्ट भेजा है, जहां के यात्री सेंट हेलेना में जहाज से उतर चुके थे. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए WHO के विशेषज्ञ, नीदरलैंड के डॉक्टर और यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल की टीम जहाज पर पहुंच चुकी है. यह टीम यात्रियों की मेडिकल जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इंफेक्शन जहाज के अंदर फैला या लोग पहले से इंफेक्टेड थे.

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।