Iran Minab School Attack Update: ईरान के मीनाब शहर में एक स्कूल पर हुए विनाशकारी मिसाइल हमले को लेकर अमेरिकी सेना की शुरुआती जांच में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक इस हमले के पीछे खुद अमेरिका की एक गंभीर तकनीकी और खुफिया गलती जिम्मेदार है। इस हमले में करीब 175 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें 168 बच्चे शामिल बताए जा रहे हैं। अगर जांच में यह बात आधिकारिक तौर पर साबित हो जाती है, तो यह पिछले करीब दो दशकों में अमेरिकी सैन्य अभियानों के दौरान नागरिकों की मौत की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक मानी जाएगी।
Iran Minab School Attack Update: पुराने खुफिया डेटा की वजह से हुआ हमला?

जांच में पता चला है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने हमले के लिए जो लक्ष्य तय किया था, उसके निर्देशांक पुराने खुफिया डेटा के आधार पर तैयार किए गए थे। यह जानकारी अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) की रिपोर्ट से ली गई थी। असल में टॉमहॉक मिसाइल का लक्ष्य एक ईरानी सैन्य ठिकाना था, जो ‘शजरा तैयबा’ प्राथमिक विद्यालय की इमारत के बिल्कुल पास मौजूद था। बताया जा रहा है कि कई साल पहले यह स्कूल उसी सैन्य परिसर का हिस्सा हुआ करता था। बाद में इस इलाके को अलग कर दिया गया और वहां स्कूल शुरू कर दिया गया।
Minab School Attack: स्कूल में बच्चों की मौजूदगी के दौरान हुआ हमला

यह हमला शनिवार की सुबह हुआ, जो ईरान में स्कूल का पहला कार्य दिवस होता है। उस समय स्कूल में बड़ी संख्या में बच्चे मौजूद थे। इसी वजह से इस घटना में बड़ी संख्या में मासूमों की मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स और सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से यह भी सामने आया है कि साल 2017 तक यह इलाका सैन्य परिसर का हिस्सा था।
इसके बाद एक दीवार बनाकर स्कूल को अलग कर दिया गया और वहां मौजूद वॉच टावर भी हटा दिया गया था। स्कूल की इमारत को नीले और गुलाबी रंग से रंगा गया था, जो सैटेलाइट तस्वीरों में भी साफ दिखाई देता था। ऑनलाइन मैप्स और इंटरनेट पर भी इसे स्कूल के रूप में दर्ज किया गया है।
US Missile Strike Iran: क्या AI सिस्टम की वजह से हुई चूक?

ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में अमेरिका बड़े पैमाने पर आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर रहा है। बताया जाता है कि युद्ध के शुरुआती 24 घंटों में अमेरिका ने ईरान के करीब 1000 ठिकानों को निशाना बनाया था। इस हमले के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं किसी एआई सिस्टम की गलती से यह त्रासदी तो नहीं हुई।
रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी सेना युद्ध तकनीक से जुड़ी कंपनी पलंटिर के ‘मेवेन स्मार्ट सिस्टम’ का उपयोग करती है। इस सिस्टम में एंथ्रोपिक कंपनी का एआई मॉडल ‘क्लॉड’ भी इस्तेमाल किया जाता है, जो टार्गेट की लोकेशन और जानकारी देने में मदद करता है। शुरुआती जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि सिस्टम में लोकेशन से जुड़ा पुराना डेटा अपडेट नहीं हुआ, जिसके कारण लक्ष्य की पहचान में गलती हो गई।
US Response on Attack: अमेरिका की प्रतिक्रिया और राजनीतिक बहस
अमेरिका ने हमेशा यह दावा किया है कि उसकी सेना नागरिक इलाकों को निशाना नहीं बनाती। फिलहाल इस घटना की जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है। इस मामले पर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अलग बयान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने खुद ही अपने स्कूल पर बमबारी की हो सकती है क्योंकि उनके हथियार अक्सर सटीक नहीं होते। हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि अभी यह साफ नहीं है कि गलती किसकी है और वह पेंटागन की जांच के नतीजों का इंतजार करेंगे।
इसी बीच अमेरिकी संसद में भी इस घटना को लेकर सवाल उठने लगे हैं। 45 से अधिक डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने रक्षा मंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले की गहन जांच की मांग की है। कई रिपब्लिकन नेताओं ने भी कहा है कि अगर गलती हुई है तो उसे स्वीकार किया जाना चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने जरूरी हैं।
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