कासगंज सर्राफा व्यापारी से लूट कांड में बड़ा खुलासा, तीन पुलिस इंस्पेक्टर फरार, सिस्टम पर उठे सवाल

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Kasganj News: उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में सर्राफा व्यापारी से कथित अवैध वसूली का मामला अब काफी गंभीर हो गया है। पटियाली थाना क्षेत्र से जुड़े इस मामले में जांच के दौरान पुलिस विभाग के तीन अधिकारियों के नाम सामने आने के बाद वे जिले से गायब हो गए हैं। इनमें दो वर्तमान इंस्पेक्टर और एक पूर्व एसओजी प्रभारी शामिल बताए जा रहे हैं। खास बात यह है कि इनमें से एक इंस्पेक्टर को हाल ही में, करीब नौ दिन पहले ही पटियाली थाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। Kasganj News: कब हुई घटना? यह घटना 20 जुलाई 2025…

Kasganj News: उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में सर्राफा व्यापारी से कथित अवैध वसूली का मामला अब काफी गंभीर हो गया है। पटियाली थाना क्षेत्र से जुड़े इस मामले में जांच के दौरान पुलिस विभाग के तीन अधिकारियों के नाम सामने आने के बाद वे जिले से गायब हो गए हैं। इनमें दो वर्तमान इंस्पेक्टर और एक पूर्व एसओजी प्रभारी शामिल बताए जा रहे हैं। खास बात यह है कि इनमें से एक इंस्पेक्टर को हाल ही में, करीब नौ दिन पहले ही पटियाली थाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

Kasganj News: कब हुई घटना?

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यह घटना 20 जुलाई 2025 की बताई जा रही है। सहावर क्षेत्र के रहने वाले सर्राफा व्यापारी अजय कुमार वर्मा का आरोप है कि उन्हें उनकी दुकान से उठाकर थाने ले जाया गया। वहां उनके साथ दबाव बनाकर पहले 50 हजार रुपये और सोना-चांदी लिया गया। इसके बावजूद उन्हें छोड़ा नहीं गया और उनके परिजनों से और पैसे मंगवाने के लिए मजबूर किया गया। आरोप है कि करीब तीन लाख रुपये अतिरिक्त मिलने के बाद ही उन्हें रिहा किया गया।

FIR और शुरुआती जांच पर सवाल

पीड़ित की शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बाद पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देश पर मामला दर्ज किया गया। एफआईआर में कुछ पुलिसकर्मियों और एक स्थानीय भाजपा नेता का नाम शामिल किया गया, लेकिन शुरुआत में थाना प्रभारी, एसओजी प्रभारी और सर्विलांस प्रभारी के नाम नहीं जोड़े गए। इससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होने लगे।

DGP के हस्तक्षेप के बाद खुलासा

मामला बढ़ने पर डीजीपी के निर्देश पर दोबारा जांच शुरू की गई। इस बार जांच में संबंधित अधिकारियों के नाम भी सामने आए और उन्हें केस में शामिल किया गया। गोपनीय जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। इनमें से दो सिपाहियों को जेल भी भेजा गया, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई।

आरोपियों की बहाली पर विवाद

इस पूरे मामले में एक और विवाद तब खड़ा हुआ जब आरोपित इंस्पेक्टर और दारोगा को पहले ही बहाल कर दिया गया। इस फैसले पर कई सवाल उठे और पीड़ित पक्ष ने भी इसे लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि आरोपियों को जिले से बाहर भेजने के बजाय स्थानीय थानों में ही तैनात किया गया, जिससे उनके परिवार को खतरा महसूस हो रहा है।

पीड़ित ने लगाए धमकी के आरोप

पीड़ित अजय कुमार वर्मा ने डीजीपी से मिलकर शिकायत की कि उन पर केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। साथ ही उन्हें और उनके परिवार को धमकियां भी दी जा रही हैं। इन आरोपों के बाद मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है। डीजीपी के सख्त निर्देशों के बाद जांच में तेजी आई। जैसे ही तीनों अधिकारियों के नाम सामने आए, वे जिले से फरार हो गए। अब उनकी गिरफ्तारी और मामले में बरामदगी को लेकर पुलिस पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।