उत्तर प्रदेश में 14 अक्टूबर को पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सरकार के पंचायत चुनाव समय पर न कराने और मौजूदा ग्राम प्रधानों को एडमिनिस्ट्रेटर (प्रशासक) नियुक्त करने के फैसले को चुनौती देते हुए कोर्ट में 11 याचिकाएं दायर की गईं। इनमें 6 जनहित याचिकाएं (PIL) भी शामिल थीं। याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि पंचायत चुनाव जल्द कराए जाए और चुनाव होने तक ग्राम प्रधानों को एडमिनिस्ट्रेटर बनाए रखने के फैसले पर फिर से विचार किया जाए। कोर्ट ने सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई के बाद अपना ये फैसला सुनाया है।
ग्राम प्रधानों और पंचायत चुनाव पर क्या होगा असर?
बता दें कि इस मामले में एक अहम मुद्दा ग्राम पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद निवर्तमान प्रधानो (गाँव के मुखिया) को एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर बनाए रखने का भी एक फैसला शामिल था। सरकार के इस फैसले को याचिकाओं में चुनौती दी गई थी। हालंकि, जानकारी में निवर्तमान प्रधानों के एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर काम करते रहने का जिक्र है, लेकिन मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि जून 2026 में हुई सुनवाई के दौरान, हाई कोर्ट ने प्रधानों को एडमिनिस्ट्रेटर बनाए रखने वाले विचार पर रोक लगा दी थी। इसलिए, तीन महीने के भीतर चुनाव कराने और एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर प्रधानों की स्थिति के बारे में अंतिम आदेश की कोर्ट के आधिकारिक आदेश से जानकारी लेनी जरूरी है।
कब होंगे यूपी में पंचायत चुनाव?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अगले तीन महीने के अंदर पंचायत चुनाव कराने का बड़ा आदेश दिया है। इस आदेश के बाद चुनाव की तैयारी में तेजी आ सकती है। हालांकि, मतदान की तारीख अभी सामने नहीं आई है। चुनाव कार्यक्रम जारी होने के बाद ही नामांकन, मतदान और मतगणना की तारीखों के बारे में कुछ कहा जा सकता है। फिलहाल, आधिकारिक घोषणा बाकी है।


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