Uttar Pradesh News: फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा के डॉक्टरों ने गंभीर हार्ट फेलियर से जूझ रहे 84 वर्षीय मरीज का सफल इलाज किया है। मरीज के दिल के एक वाल्व में लगातार खून का रिसाव हो रहा था। उनकी उम्र और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए ओपन हार्ट सर्जरी करना काफी जोखिम भरा था। ऐसे में डॉक्टरों ने MitraClip की मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया के जरिए उनका इलाज किया। अस्पताल के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में इस तरह का यह अपनी तरह का पहला मामला है। इस जटिल प्रक्रिया को फोर्टिस ग्रेटर नोएडा की कार्डियोलॉजी टीम ने डॉ. हरनीश सिंह भाटिया, सीनियर कंसल्टेंट-कार्डियोलॉजी के नेतृत्व में पूरा किया।
84 वर्षीय मरीज जब अस्पताल पहुंचे तो उन्हें काफी ज्यादा सांस फूलने की समस्या थी। वह लगातार कमजोरी महसूस कर रहे थे और उन्हें बार-बार हार्ट फेलियर की परेशानी हो रही थी। जांच के दौरान डॉक्टरों को पता चला कि उनके दिल का माइट्रल वाल्व ठीक से बंद नहीं हो रहा था। यह वाल्व हृदय में खून के सही दिशा में बहने में मदद करता है। वाल्व के ठीक से बंद नहीं होने के कारण खून का कुछ हिस्सा वापस पीछे की ओर जाने लगा था।इस वजह से मरीज के पहले से कमजोर दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा था। जांच में सामने आया कि उनका दिल केवल 30 से 35 प्रतिशत क्षमता के साथ काम कर रहा था।
पहले से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं
मरीज की स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बनाने वाली कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी थीं। फरवरी 2026 में उनकी हृदय की धमनियों में स्टेंट डाले गए थे। इसके अलावा, उनके शरीर में केवल एक गुर्दा ही काम कर रहा था। मरीज को प्रोस्टेट बढ़ने की समस्या भी थी और वह गंभीर यूरिनरी इंफेक्शन से भी जूझ रहे थे। उम्र अधिक होने के साथ-साथ उनका दिल काफी कमजोर था। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी में कई तरह के जोखिम थे। डॉक्टरों के सामने चुनौती यह थी कि वाल्व से हो रहे रिसाव को कम किया जाए, लेकिन मरीज के शरीर पर बड़ी सर्जरी का अतिरिक्त दबाव न पड़े।
मरीज की स्थिति का विस्तार से आकलन करने के बाद मेडिकल टीम ने MitraClip प्रक्रिया से इलाज करने का फैसला किया। यह एक मिनिमली इनवेसिव यानी कम चीरे वाली प्रक्रिया है। इसमें मरीज की छाती को खोलने की जरूरत नहीं पड़ती। इस तकनीक की मदद से दिल के माइट्रल वाल्व में हो रहे रिसाव को कम किया जाता है। प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर पैर की रक्त वाहिका के रास्ते एक बेहद छोटी क्लिप को हृदय तक पहुंचाते हैं। इस मामले में डॉक्टरों ने MitraClip XTW G4 का इस्तेमाल किया। 3D इमेजिंग की मदद से डॉक्टरों ने क्लिप को सही जगह पर लगाया। इसका उद्देश्य माइट्रल वाल्व को बेहतर तरीके से बंद करना और खून के पीछे की ओर होने वाले रिसाव को कम करना था।
बिना बड़ी सर्जरी के सफल रहा इलाज
डॉक्टरों के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी बड़ी जटिलता का सामना नहीं करना पड़ा। क्लिप लगाने के बाद माइट्रल वाल्व से होने वाला रिसाव कम हुआ। प्रक्रिया पूरी होने के बाद मरीज की हालत में भी सुधार देखा गया। उनकी सांस फूलने जैसी समस्या में राहत मिली और उनकी स्थिति स्थिर होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। फिलहाल कार्डियोलॉजी टीम लगातार मरीज की निगरानी और फॉलो-अप कर रही है।
डॉक्टरों के अनुसार, माइट्रल वाल्व से लगातार खून का रिसाव होने की स्थिति को नजरअंदाज करना मरीज के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकता था। इससे पहले से कमजोर दिल पर दबाव और बढ़ सकता था। ऐसी स्थिति में हार्ट फेलियर की समस्या गंभीर हो सकती है। मरीज को बार-बार अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ सकती है और उनकी सामान्य सेहत भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए समय पर वाल्व के रिसाव का इलाज करना जरूरी था।
डॉक्टर ने बताया क्यों था मामला चुनौतीपूर्ण
डॉ. हरनीश सिंह भाटिया ने बताया कि मरीज की उम्र, गंभीर हार्ट फेलियर, हाल में हृदय की धमनियों में किए गए उपचार और केवल एक गुर्दे के काम करने के कारण यह काफी चुनौतीपूर्ण मामला था। उन्होंने कहा कि ऐसे हाई-रिस्क मरीज में ओपन हार्ट सर्जरी करना आसान नहीं होता। MitraClip तकनीक ने मरीज के सीने में बड़ा चीरा लगाए बिना वाल्व की समस्या को ठीक करने का विकल्प दिया।
डॉ. भाटिया के मुताबिक, इस तरह के मामलों में मरीज का सही चयन और आधुनिक कार्डियक तकनीक काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे उन मरीजों के इलाज की संभावना भी बढ़ती है, जिनके लिए सामान्य सर्जरी का विकल्प बहुत जोखिम भरा हो सकता है।
अस्पताल ने उन्नत इलाज को बताया अहम कदम
फोर्टिस ग्रेटर नोएडा की फैसिलिटी डायरेक्टर बिंदु शर्मा ने कहा कि जटिल हृदय रोगों के इलाज के लिए डॉक्टरों के अनुभव के साथ आधुनिक तकनीक और टीमवर्क भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि अस्पताल लगातार अपनी कार्डियक सेवाओं को मजबूत कर रहा है, ताकि मरीजों को उनके घर के नजदीक ही आधुनिक इलाज की सुविधा मिल सके।
बिंदु शर्मा के अनुसार, इस मरीज के मामले में डॉक्टरों ने उसकी उम्र और अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कम जोखिम वाली प्रक्रिया का विकल्प चुना। इलाज के बाद मरीज की स्थिति में आया सुधार यह बताता है कि हाई-रिस्क मरीजों के लिए विशेषज्ञ और आधुनिक कार्डियक उपचार कितना महत्वपूर्ण है।फोर्टिस ग्रेटर नोएडा की टीम के अनुसार, इस सफल MitraClip प्रक्रिया से गंभीर हार्ट फेलियर और वाल्व संबंधी जटिल समस्या वाले मरीजों के लिए एक कम इनवेसिव उपचार विकल्प की उपयोगिता सामने आई है।



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