Vastu Tips

क्या कहता है वास्तु ? कैसे बनते हैं मैरिज के योग

By- Yogita Tyagi

March 23, 2024

वास्तुशास्त्र प्रकृतिक ऊर्जा और तत्वों के संतुलन पर आधारित है, जिससे घर और व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है

वास्तु की नजर से देखा जाए तो घर के बहुत से स्थानों से हमें संकेत मिलते हैं कि समस्या कहाँ पर है

घर का मुख्य द्वार यदि गलत जगह पर है तो ऐसे घर में प्रवेश के साथ ही लोगों की मानसिकता बदल जाती है

अवसरों को देने का काम अग्नि कोण का है यदि वह ठीक नहीं तो रिश्ते वाले आयेंगे ही नहीं विवाह होना तो दूर की बात है

यदि घर में पिछले 10-15 वर्षों से कोई मांगलिक कार्य नहीं हुआ है तो इसका मतलब है कि भूमि में कोई दोष है

ज्योतिष, हस्तरेखाओं और वास्तु तीनों टूल्स के सम्मिलित आकलन से विवाह के संदर्भ में कोई निर्णय करें जिससे जल्दी परिणाम मिले

बहुत से लोग इस अफवाह में विश्वास रखते हैं कि सबसे छोटी अंगुली के नीचे प्रेम या विवाह की रेखाएं होती हैं लेकिन इन रेखाओं का विवाह से कोई संबंध नहीं है

प्रेम विवाह की रेखाएँ बृहस्पति और मंगल के स्थान पर होती हैं। जब इन रेखाओं का परस्पर योग बने तो उस उम्र में व्यक्ति प्रेम संबंध बनाने की शुरुआत करता है

रेखाएँ जितनी दीर्घ होंगी प्रेम संबंध उतना ही लम्बा चलेगा जब ये रेखाएँ सुंदर और स्पष्ट आकार में जहाँ परस्पर मिलें उसी उम्र विशेष में जातक का प्रेम विवाह होता है

यदि ये रेखाएँ एक दूसरे से दूर रहकर ही रुक जाती हैं तो प्रेम तो होगा लेकिन यह प्रेम विवाह में कन्वर्ट नहीं होगा

जब ये रेखाएँ एक दूसरे को काट कर आगे बढ़ रही हों तो भी प्रेम विवाह होता है

जब ये रेखाएँ कटी-फटी स्थिति में एक-दूसरे से मिल रही हों तो प्रेम विवाह तो होगा लेकिन शीघ्र ही दोनों प्रेमियों में मतभेद हो जाएगा और दोनों अलग हो जायेंगे