अमेरिकी जासूसी जहाज यूएसएस प्यूब्लो के बचे हुए लोग उत्तर कोरिया के खिलाफ मुकदमा दायर करने जा रहे हैं। यह मुकदमा कोरिया प्रायद्वीप पर इस जहाज को जब्त कर और उसके चालक दल को 11 महीने तक बंधक बनाकर प्रताड़ित किए जाने के 50 साल बाद दायर किया जा रहा है। चालक दल के 100 से ज्यादा सदस्य और उनके रिश्तेदार मुकदमे में शामिल हुए।
मुकदमा इस माह संघीय अदालत में विदेशी स्वायत्त प्रतिरक्षा अधिनियम के तहत दायर किया गया है, जो पीड़ितों को एक देश द्वारा यातना, बंधक बनाने, व्यक्तिगत चोट या मृत्यु के लिए आतंकवाद के खिलाफ मामला दायर करने की अनुमति देता है।
अभियोगी के वकील ने सोमवार रात सीएनएन को दिए बयान में कहा, ’50 साल से ज्यादा समय से पहले यूएसएस प्यूबलो के चालक दल के खिलाफ किए गए इस तरह के अकथनीय कार्य और उसके बाद से उनके और उनके परिवारों पर पड़े इसके असर के लिए हमारे मुवक्किल उत्तर कोरिया से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।’ सीएनएन की खबर के मुताबिक, प्यूबलो को उत्तर कोरिया ने उस वक्त जब्त कर लिया था, जब जहाज 23 जनवरी 1968 को कोरिया प्रायद्वीप के तट पर अंतर्राष्ट्रीय जल सीमा में था।
चालक दल के 83 सदस्यों को उत्तर कोरिया के वोनसान बंदरगाह के लिए निर्वासित कर दिया गया था और बाद में उन्हें प्योंगयांग के समीप हिरासत केंद्र में भेज दिया गया था। वह 11 महीने तक वहां रहे जब तक अमेरिका ने उत्तर कोरिया से लिखित माफी मसौदे पर हस्ताक्षर नहीं किए। इसके बाद अंतत: उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच असैन्य क्षेत्र में पुरुषों को रिहा कर दिया गया।
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